नेहा मौर्या
दिल्ली सरकार ने राजधानी में संचालित कोचिंग संस्थानों के लिए एक व्यापक नियामक ढांचा (रेगुलेटरी फ्रेमवर्क) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पहल का उद्देश्य कोचिंग सेंटरों की मनमानी पर रोक लगाना, छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संस्थानों की जवाबदेही तय करना है।
कौन से होंगे नियम?
दिल्ली के राजेंद्र नगर और मुखर्जी नगर जैसे क्षेत्र लंबे समय से देश के प्रमुख कोचिंग हब के रूप में पहचान रखते हैं। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), SSC, बैंकिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए देशभर से लाखों छात्र यहां पहुंचते हैं। छात्रों का मानना है कि इन क्षेत्रों का शैक्षणिक माहौल, पुस्तकालयों की उपलब्धता और अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन सफलता की राह को आसान बनाता है।
प्रस्तावित ढांचे में छात्र सुरक्षा, भवन सुरक्षा, फायर सेफ्टी और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा कोचिंग सेंटरों का समय-समय पर निरीक्षण करने, फीस संबंधी शिकायतों के समाधान और संस्थानों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाएगी। सरकार का दावा है कि इस प्रकार का व्यापक नियामक ढांचा लागू करने वाला दिल्ली देश का पहला राज्य बन सकता है।
दरअसल, इस पहल की पृष्ठभूमि वर्ष 2024 में ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित एक कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में जलभराव के कारण हुई छात्रों की दर्दनाक मौतों की घटना है। इस हादसे के बाद सुरक्षा मानकों और नियमन को लेकर कई सिफारिशें सामने आई थीं, लेकिन अब तक कोई ठोस व्यवस्था लागू नहीं हो सकी थी।
कोचिंग के फर्जी दावों पर लगेगी लगाम?
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में कोचिंग उद्योग के तेजी से विस्तार के साथ कई चुनौतियां भी सामने आई हैं। सोशल मीडिया और आकर्षक विज्ञापनों के माध्यम से कई संस्थान छात्रों को बड़े-बड़े दावे कर अपनी ओर आकर्षित करते हैं। कई बार छात्र सुविधाओं और गुणवत्ता की पूरी जानकारी लिए बिना भारी-भरकम फीस जमा कर देते हैं। वहीं, डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव ने छात्रों को अपने गृह नगर से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का विकल्प भी उपलब्ध कराया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा को केवल व्यवसाय या कमाई का माध्यम नहीं माना जाना चाहिए। इसका मूल उद्देश्य युवाओं को शिक्षित, सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बनाना है। शिक्षा न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करती है, बल्कि समाज के लिए योग्य और जागरूक व्यक्तियों का निर्माण भी करती है।
कोचिंग संस्थानों के लिए एक प्रभावी नियामक व्यवस्था छात्रों के हितों की रक्षा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। अब देखना होगा कि जो कोचिंग संस्थान अपने विज्ञापनों के ज़रिए फर्जी दावे करते हैं, उसमें कितनी लगाम लगती है?
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