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चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की तिथि है आज….हिंदू नव वर्ष 2026 की हुई शुरुआत…जानें देशभर में मनाए जाने वाला ये पर्व है कितना ख़ास?

हिंदी, हिंदू और हिंदुस्तान..इन सब पर हमें गर्व होना चाहिए। अंग्रेजी सीखने और बोलने में बुराई नहीं है लेकिन अंग्रेजी मानसिकता रखना बुरा है। हमें अपनी संस्कृति से जुड़े हर पर्व पर गर्व होना चाहिए। सिर्फ 2 महीने पहले अंग्रेजी नववर्ष के सिलेब्रेशन में डूबी हमारी नई पीढ़ी को हिंदू नव वर्ष को भी पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाना चाहिए। आज यानि 19 मार्च को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि है और इसी तिथि से शुरू होता है हिंदू नव वर्ष। ये केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि जीवनशैली को संतुलित करने का वैज्ञानिक तथा भी है। आइए जानते हैं कि देश भर में अलग अलग नाम से मनाए जाने वाले इस पर्व का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व क्या है?

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नई दिल्ली.  आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की तिथि है। आज से नवरात्रि शुरू हो रहा है तो वहीं हिंदू नव वर्ष भी शुरू हो रहा है क्योंकि हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से हिंदू नव वर्ष का शुभारंभ होता है । देशभर में ये पर्व अलग-अलग नामों से मनाया जाता है।  यह पर्व । यह दिन भारतीय संस्कृति में अत्यंत पवित्र माना जाता है।
पर्व एक, नाम अनेक
देशभर में सांस्कृतिक विविधता इस पर्व को और भी खास बना देती है।  देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे विभिन्न नामों से मनाया जाता है:
  • उगादी (आंध्र प्रदेश, कर्नाटक)
  • गुड़ी पड़वा (महाराष्ट्र)
  • बैसाखी (पंजाब)
  • नवरेह (कश्मीर)
  • चेतीचंड (सिंधी समाज)
  • विषु (केरल)
  • बिहू (असम)
  • पोयला बोइशाख (पश्चिम बंगाल)

क्या है धार्मिक मान्यता?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने ब्रह्मांड की रचना की शुरुआत की थी। वहीं, सतयुग का आरंभ भी इसी तिथि से जुड़ा माना जाता है। यह आस्था से जुड़ा पर्व है जो कि विविधता में एकता का भी प्रतीक है। भौगोलिक विविधताओं के बावजूद, पूरे देश में यह समय नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
क्या है वैज्ञानिक मान्यता?
यह समय सर्दी से गर्मी की ओर मौसम बदलने का होता है। इस दौरान प्रकृति में नई ऊर्जा का संचार होता है, जिसका असर सीधे मानव शरीर और मानसिक स्थिति पर पड़ता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह अवधि शरीर को डिटॉक्स करने और नई दिनचर्या अपनाने के लिए सबसे उपयुक्त होती है।
मौसम में बदलाव के अनुसार अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। पारंपरिक भारतीय जीवनशैली में इसके लिए स्पष्ट नियम बताए गए हैं:
  • हल्का और सुपाच्य भोजन करें
  • मसालेदार और तले-भुने खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं
  • पानी और तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाएं
  • मौसमी फलों और प्राकृतिक आहार को अपनाएं
  • सकारात्मक सोच और नियमित दिनचर्या बनाए रखें
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