अरुणेश द्विवेदी, वायरल अलर्ट डेस्क
नई दिल्ली. UPI यानि Unified Payments Interface जो कि नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के द्वारा विकसित किया गया है. इसके जरिए लाखों लोग ऑन-लाइन ट्रांजैक्शन करते हैं. सरकार द्वारा इस पर टैक्स लगाने का दावा किया जा रहा है.
क्या है वायरल ख़बर ?
सोशल मीडिया पर UPI पेमेंट से जुड़ी एक पोस्ट बहुत तेजी से फैल रही है. इसके जरिए कहा जा रहा है कि सरकार ने यूपीआई ट्रांजैक्शन पर टैक्स लगा दिया है.
वायरल ख़बर के मुताबिक, यूपीआई से 2 हज़ार या इससे ज्यादा का ट्रांजैक्शन करने पर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानि GST लगाया जाएगा.
इस वायरल खबर से लोग परेशान हो गए क्योंकि उनको लगा कि अब सरकार उनसे डिजिटल पेमेंट पर टैक्स लेगी इसलिए हमारी वायरल अलर्ट की टीम ने इस ख़बर की सच्चाई का पता लगाया.
क्या है वायरल ख़बर की सच्चाई?
इस वायरल ख़बर की सच्चाई वित्त मंत्रालय के द्वारा बताई गई. एक ऑफिशियल स्टेटमेंट में मंत्रालय ने कहा कि ‘यूपीआई से 2,000 रुपये से ज्यादा भेजने या प्राप्त करने पर जीएसटी लगाने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है.’
ऐसे में यह दावा पूरी तरह गलत है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस ख़बर में कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है. इसका अर्थ ये हुआ कि लोगों को UPI ट्रांजैक्शन पर कोई टैक्स नहीं देना होगा.
क्या है जीएसटी ?
जीएसटी यानि गुड्स एंड सर्विस टैक्स 1 जुलाई 2017 को लागू हुआ था. यह एक तरीके का इनडायरेक्ट टैक्स है. इसके जरिए ऐसा सिस्टम बनाया गया जिसमें वैल्यु ऐडेड टैक्स यानि वैट, एक्साइज ड्यूटी और सर्विस टैक्स को मिलाया गया.
GST का उद्देश्य एक देश, एक टैक्स का प्रावधान करना था इसे वन नेशन, वन टैक्स भी कहा जाता है. इससे व्यापारियों को फायदा हुआ और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा मिला.


