नई दिल्ली। महिलाएं हर क्षेत्र में कामयाब हो रही हैं। उन क्षेत्रों में भी जहां माना जाता है कि ये पुरुष प्रधान क्षेत्र है जैसे कि पब, क्लब में बाउंसर्स की जॉब, फिल्मी सितारों जैसे सिलेब्रेटिज को सुरक्षा प्रदान करना लेकन आज हम आपको मिलवाते हैं दो बाउंसर्स बहनों निशा और तरन्नुम से जिन्होंने अपनी ख़ास पहचान बनाई है।
आप दोनों ने अपनी पढ़ाई के दिनों में अपने करियर को लेकर क्या सोचा था?
निशा:
शुरुआत में मेरा सपना पुलिस में जाने का था। पढ़ाई भी उसी दिशा में कर रही थी, लेकिन परिस्थितियां बदलीं और मुझे सुरक्षा क्षेत्र में काम करने का मौका मिला। मैंने इसे चुनौती की तरह लिया।
तरन्नुम:
मैं पढ़ाई के साथ आगे चलकर टीचिंग या पीएचडी करना चाहती थी, लेकिन जब मैंने अपनी दीदी को इस फील्ड में सफल होते देखा, तो मुझे लगा कि मैं भी इस क्षेत्र में महिलाओं के लिए कुछ नया कर सकती हूं।
आप लोग यूपी के सहारनपुर के रहने वाले हैं तो आपने कब दिल्ली आने का सोचा और आपका सहारनपुर से दिल्ली तक के सफर में कितना संघर्ष करना पड़ा?
निशा:
गांव से निकलकर दिल्ली जैसे बड़े शहर में काम करना आसान नहीं था। परिवार का सीमित समर्थन, समाज की सोच और खुद को साबित करने की चुनौती सब कुछ साथ-साथ था। लेकिन मेहनत और आत्मविश्वास ने रास्ता बना दिया।
आपने बाउंसर्स बनने का ही क्यों सोचा, पुरुष-प्रधान फील्ड में महिला बाउंसर बनना कितना कठिन है?
तरन्नुम:
शुरुआत में लोगों को भरोसा नहीं होता था कि महिलाएं भी सिक्योरिटी संभाल सकती हैं। लेकिन समय के साथ जब उन्होंने हमारा काम देखा, तो सोच बदली। आज कई क्लब और इवेंट्स महिला सिक्योरिटी को प्राथमिकता देते हैं।
काम के दौरान किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
निशा:
लंबी शिफ्ट, रात की ड्यूटी, मानसिक दबाव सब होता है। कई बार नशे में लोग बहस करते हैं, लेकिन हमारा नियम साफ है शांति, संयम और प्रोफेशनल व्यवहार।
तरन्नुम:
हमेशा याद रखना पड़ता है कि गुस्सा नहीं, समझदारी से काम लेना सबसे बड़ा गुण है।
क्या आपने सेलिब्रिटिज को भी सिक्योरिटी प्रदान काम किया है?
निशा:
हां, हमें बॉलीवुड सेलिब्रिटीज जैसे प्रियंका चोपड़ा और प्रीति जिंटा की सिक्योरिटी टीम के साथ काम करने का अवसर मिला। वहां प्रोफेशनलिज़्म बहुत उच्च स्तर का होता है। उन्होंने भी महिला सिक्योरिटी की सराहना की, जो हमारे लिए गर्व की बात थी
जो लड़कियां इस फील्ड में आना चाहती हैं, उनके लिए क्या संदेश है?
निशा:
खुद पर भरोसा रखें। महिला होना कमजोरी नहीं, ताकत है।
तरन्नुम:
गुस्से पर काबू, अनुशासन और आत्मसम्मान, ये तीन चीजें अगर आपके अंदर हैं, तो आप इस फील्ड में जरूर सफल होंगी।
आप लोगों की कहानी इस बात का प्रमाण है कि महिलाएं अबला नहीं, सबला हैं। अगर उन्हें अवसर, सम्मान और समर्थन मिले, तो वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं।
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