बेंगलुरु. (एजेंसियां). आईपीएल की ट्रॉफी RCB ने जीत ली. इसके बाद हुए जीत का जश्न मौत के मातम में बदल गया. बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर भारी भीड़ जीत के जश्न में शामिल होने के लिए आई लेकिन पुलिस प्रशासन की लापरवाही से भगदड़ मच गई.
किसकी गड़बड़ी से हुई भगदड़?
RCB मैनेजमेंट ने जीत का जश्न मनाने का एलान अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल्स से किया था जिसकी परमीशन पुलिस ने नहीं दी फिर भी स्टेडियम में भारी भीड़ इकट्ठा हो गई.
कर्नाटक के डिप्टी सीएम डी. शिवकुमार ने कहा कि इतनी भारी भीड़ का अंदाजा नहीं था. भीड़ बेकाबू होने लगी तो पुलिस ने हल्का लाठी चार्ज किया. इस भीड़ को मैनेज करने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की थी जिसमें वे नाकाम साबित हुए.
स्टेडियम की क्षमता केवल 35 हजार लोगों की था लेकिन लगभग 3 लाख आ गए. भगदड़ की वजह से 11 लोग मारे गए और 50 से अधिक लोग गंभीर रुप से घायल हो गए।
पहली नज़र में इस भगदड़ में पुलिस प्रशासन और आरसीबी प्रशासन की गड़बड़ी नज़र आ रही है. RCB ने इस हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के लिए संवेदनाएं व्यक्त करने अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली.
बीसीसीआई ने क्या कहा?
वहीं इस हादसे पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानि BCCI ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. BCCI के सचिव देवजीत सैकिया ने कहा कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के जिम्मेदार आयोजक हैं. उनकी जश्न की योजना में भारी चूक हुई है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी अव्यवस्था से उत्पन्न भगदड़ से बचा जा सके, इसके लिए आवश्यक दिशा निर्देश बनाए जाएंगे. इसके अलावा आयोजकों और सुरक्षा एजेंसियों के लिए भीड़ प्रबंधन के उपायों को और अधिक सख्त किया जाएगा।
ख़बर का संपादकीय
क्रिकेट हमारे देश में एक ऐसा धर्म बन गया है जिसके हजारों-लाखों फैंस हैं जो हर धर्म से हैं. दरअसल क्रिकेट अब खेल कम, व्यापार ज्यादा हो गया है. खिलाड़ियों की बोली लगती है फिर जीतने वाली टीम को करोड़ों रुपए मिलते हैं. बीसीसीआई दुनिया का सबसे धनी बोर्ड है.
क्रिकेट और क्रिकेटर्स की लोकप्रियता ही बड़ी कंपनियों को आकर्षित करते हैं जिसको वे कभी ब्रांड एंबेसर बनाती है तो कभी बड़-बड़े-बड़े विज्ञापन करवाती है और इन सबके लिए क्रिकेट के फैंस ही सबसे बड़ा बाजार बनाते हैं. ये सब अपनी जगह ठीक है लेकिन जिन फैंस की वजह से ये खेल है, ये खिलाड़ी हैं, ये व्यापार है उनकी जान की ही परवाह न तो सरकार करे, न तो पुलिस प्रशासन करे और न ही क्रिकेट मैनेजमेंट के लोग करें तो गंभीर सवाल उठ खड़े होते हैं.
बेंगलुरू की इस घटना के पीछे कौन जिम्मेदार हैं पुलिस के इंकार करने के बाद RCB मैनेजमेंट ने क्यों जश्न किया. भगदड़ होने की सूचना मिलने के बाद भी स्टेडियम में सीएम, डिप्टी सीएम क्रिकेटर्स के साथ क्यों जश्न मनाते रहे. वीआईपी कल्चर की वजह से पुलिस प्रशासन के अधिकारी वीआईपी लोगों की देखभाल में लगे रहे, पब्लिक की ओर ध्यान क्यों नहीं दिया
इन सवालों का जवाब देने के लिए कमेटी बना दी जाएगी, फिर कुछ महीनों में रिपोर्ट आएगी जिसमें किसी साधारण कर्मचारी पर सस्पेंसन की कार्रवाई होगी. बड़े पदों पर बैठे जिम्मेदार लोग फिर बच जाएंगे जैसा कि कुंभ में हुई भगदड़, नई दिल्ली स्टेशन में हुई भगदड़ और हाथरस में हुई भगदड़ के मामलों में हुआ.
ऐसे मेें जरूरी है कि सरकार केवल पीड़ितों के लिए कुछ लाख रुपए मुआवजे देकर अपने कर्तव्य का इतिश्री न करे बल्कि लोकतंत्र के सही मायनों को समझते हुए जनता की जान की सुरक्षा करे. जिम्मेदार लोगों की जिम्मेदारी तय हो और लापरवाही करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो.



