नई दिल्ली. फीचर डेस्क
कहा जाता है कि इस धरती पर जब जब धर्म का नाश होता है और अधर्म का विस्तार होता है तब तब भगवान अवतरित होते हैं. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक़, परशुराम विष्णु भगवान के छठे अवतार माने जाते हैं.
परशुराम: रामायण से लेकर महाभारत तक है नाम
हिंदू धर्म में भगवान परशुराम को आठ चिरंजीवी अवतारों में से माना जाता है। भगवान परशुराम का नाम रामायण से लेकर महाभारत काल तक मिलता है।
रामायण में लक्ष्मण परशुराम संवाद देखने को मिलता है. जब भगवान राम, भगवान शंकर का धनुष तोड़ देते हैं तो भगवान शंकर के परम भक्त, महाज्ञानी लेकिन अत्यंत क्रोधी जनक की सभा में आकर धनुष तोड़ने वाले को मारने के लिए आतुर दिखते हैं तब भगवान राम कहते हैं कि
नाथ शंभु धनु भंज निहारा..होइ है कोऊ एक दास तुम्हारा…अर्थात भगवान आपका ही कोई दास इस धनुष को तोड़ सकता है. फिर लक्ष्मण के साथ उनका जो संवाद होता है वह आज भी रामलीला में देखने को मिलता है,
वहीं महाभारत में भगवान परशुराम को भीष्म और कर्ण का गुरु माना जाता है. परशुराम जी को ही भीष्म और कर्ण को शस्त्र विद्या और युद्ध कौशल सिखाने का श्रेय जाता है.
परशुराम जयंती की पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भगवान परशुराम जयंती पर सभी को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट लिखा
“सभी देशवासियों को भगवान परशुराम जयंती की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। शस्त्र और शास्त्रों के दिव्य ज्ञान के लिए पूजनीय भगवान परशुराम की कृपा से हर किसी का जीवन साहस और सामर्थ्य से परिपूर्ण रहे, यही कामना है।”
भगवान परशुराम की पहचान एक ऐसे भगवान के रूप में की जाती है जिन्होंने न्याय और धर्म की रक्षा की। इस साल यानि 2025 में परशुराम जयंती का महत्व बहुत अधिक माना जा रहा है क्योंकि इस साल कई शुभ योग भी बन रहे हैं।
हिंदू धर्म के पंडितों के मुताबिक परशुराम जयंती के दिन उनकी पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और जीवन में आने वाली सभी तकलीफें और रुकावटें दूर होती हैं।




