इसके बाद मनोज कुमार का परिवार दिल्ली में रहने लगा. मनोज कुमार फिल्मों के बहुत शौकीन थे. वे दिग्गज कलाकार दिलीप कुमार और अशोक कुमार की फिल्मों से बहुत प्रभावित थे. इसके बाद उन्होंने एक्टर बनने का ठान लिया था. इसके साथ ही उन्होंने अपना नाम हरिकिशन से बदलकर मनोज कुमार रख लिया.
मनोज कुमार की पहली फिल्म ‘फैशन’ 1957 में रिलीज हुई थी लेकिन ये फिल्म कुछ ख़ास चली नहीं. इसके बाद उनकी 1960 में ‘कांच की गुड़िया’ फिल्म रिलीज हुई जो सुपर हिट साबित हुई. इसके बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक सुपर हिट फिल्में जैसे ‘उपकार’, ‘पत्थर के सनम’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’, ‘संन्यासी’ और ‘क्रांति’ जैसी सुपर डुपर हिट फिल्में दीं.
मनोज कुमार ने ज्यादातर फिल्मों में देशभक्ति से ओत-प्रोत किरदार निभाए जिसके बाद से उन्हें “भारत कुमार” नाम दिया गया । उन्होंने अपनी फिल्मों के माध्यम से जनता को देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाने का संदेश दिया.
वहीं गीतकार मनोज मुंतशिर ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए इंस्टाग्राम पर लिखा,
मुझे जीवन भर इस बात का अभिमान रहा और रहेगा, कि मेरा नाम आपसे मिलता है. देशभक्ति का पहला पाठ आपकी फिल्मों ने पढ़ाया. उन्होंने आगे कहा, भारत से प्यार करना मुझे भारत कुमार ने सिखाया. आप न होते, तो वो चिंगारी न होती जो मेरी साधारण सी कलम से ‘तेरी मिट्टी’ लिखवा ले. अलविदा मेरे हीरो!
वहीं एक्टर आमिर खान ने भी मनोज कुमार के निधन पर संवेदनाएं व्यक्त की, उन्होंने लिखा,
मनोज कुमार सिर्फ एक एक्टर या फिल्ममेकर ही नहीं थे, बल्कि वे एक संस्था थे. मैंने उनकी फ़िल्में देखकर बहुत कुछ सीखा है. उनकी फ़िल्में अक्सर महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों पर आधारित होती थीं, जो उन्हें आम आदमी के बहुत करीब ले जाती थीं. उनके परिवार के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं.
YT विचार
आजकल के कुछ फिल्मकार कहते हैं कि फिल्में केवल मनोरंजन के लिए होती हैं, फिल्मों से, फिल्मकारों से समाज और देश के प्रति बहुत अधिक किसी गंभीर ज़िम्मेदारी की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए.
ऐसी सोच रखने वाले लोगों को महान देशभक्त फिल्मकार मनोज कुमार से और उनकी फिल्मों से सीखना चाहिए जिन्होंने अपनी सिनेमाई कला के माध्यम से देश का नाम रोशन किया, लोगों में देशभक्ति के जज़्बे को भरा.
फिल्में समाज का आईना होती हैं. सिनेमैटिक लिबर्टी के नाम पर, एंटरटेनमेंट के नाम पर नई जरनेशन को गलत पाठ पढ़ाना या गलत राह पर ले जाना फिल्मों या वेबसीरीज निर्माताओं का उद्देश्य नहीं होना चाहिए, फिल्में समाज का आईना होती हैं. फिल्मों की जिम्मेदारी और जवाबदेही समाज और देश के प्रति होनी चाहिए


