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NCDC को मिलेगी 2 हजार करोड़ रुपए की सहायता…जानिए किस वर्ग के लोगों को मिलेगा फायदा?

NCDC यानि National Cooperative Development Corporation की स्थापना 1963 में संसद के एक अधिनियम द्वारा सहकारिता मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निगम के रूप मे हुई थी। पीएम मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई जिसमें सहकारी निगम को इस साल से अगले चार वर्षों की अवधि के लिए 2 हजार करोड़ रुपये केंद्रीय अनुदान के रूप में दिेए जाने का फैसला किया गया। आइए जानते हैं कि इस फैसले से देश भर में मौजूद 8 लाख 25 हजार से अधिक सहकारी समितियों से जुड़े 29 करोड़ से अधिक सदस्यों को किस तरह से फायदा मिलेगा

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नई दिल्ली. देश में उत्पादन के सभी क्षेत्रों में सहकारी क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने एनसीडीसी यानि राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम को 2025-26 से 2028-29 तक चार वर्षों की अवधि के लिए दो हजार करोड़ रुपये की केंद्रीय अनुदान सहायता योजना को मंजूरी दे दी है.

भारतीय अर्थव्यवस्था में सहकारिता क्षेत्र का योगदान

सहकारिता क्षेत्र का भारतीय अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा योगदान है। सहकारी समितियां ग्रामीण इलाकों के आर्थिक विकास में  महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सरकार वर्तमान वित्त वर्ष यानि 2025-26 से अगले 4 साल तक 500 करोड़ रुपये की मदद दी जाएगी। भारत में सहकारी समितियां ऋण और बैंकिंग, उर्वरक, चीनी, डेयरी, विपणन, उपभोक्ता वस्तुएं, हथकरघा, हस्तशिल्प, मत्स्य पालन, आवास इत्यादि में विविध गतिविधियों में संचालित हैं। देश में 8 लाख 25 हजार से अधिक सहकारी समितियां हैं जिनमें 29 करोड़ से अधिक सदस्य हैं। देश में 94 प्रतिशत किसान किसी न किसी रूप में सहकारी समितियों से जुड़े हुए हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 से वित्त वर्ष 2028-29 तक दो हजार करोड़ रुपये की अनुदान सहायता के आधार पर, एनसीडीसी चार वर्षों की अवधि में खुले बाजार से 20,000 करोड़ रुपये जुटा सकेगा। एनसीडीसी इस धनराशि का उपयोग सहकारी समितियों को नई परियोजनाएं स्थापित करने/संयंत्रों के विस्तार हेतु ऋण देने और कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए करेगा।

किस वर्ग को मिलेगा फायदा?

इससे देश भर में डेयरी, पशुधन, मत्स्य पालन, चीनी, वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण और शीतगृह जैसे विभिन्न क्षेत्रों की 13,288 सहकारी समितियां और श्रमिक और महिलाओं के नेतृत्व वाली सहकारी समितियों के लगभग 2 करोड़ 90 लाख सदस्य लाभान्वित होंगे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण सामाजिक आर्थिक योगदान के कारण, डेयरी, मुर्गीपालन एवं पशुधन, मत्स्य पालन, चीनी, वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण एवं शीतगृह, श्रम सहकारी समितियों और महिला सहकारी समितियों आदि क्षेत्रों को दीर्घकालिक और कार्यशील पूंजी ऋण सहयोग आवश्यक है

कार्यान्वयन नीति और लक्ष्य:

(i) इस योजना का निष्पादन राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम करेगा जो परियोजना धनराशि के वितरण, अनुवर्ती कार्रवाई, परियोजना निगरानी और निधि से वितरित ऋण की वसूली करेगा।

(ii) दिशानिर्देशों के अनुसार, एनसीडीसी सहकारी समितियों को राज्य सरकार के माध्यम से या सीधे ऋण प्रदान करेगा। एनसीडीसी के प्रत्यक्ष वित्तपोषण दिशानिर्देशों के मानदंडों को पूरा करने वाली सहकारी समितियों को स्वीकार्य राशि या राज्य सरकार की गारंटी पर सीधे वित्तीय सहायता प्रदान करने पर विचार किया जाएगा।

(iii) एनसीडीसी, सहकारी समितियों को ऋण, विभिन्न क्षेत्रों के लिए परियोजना सुविधाओं की स्थापना/आधुनिकीकरण/प्रौद्योगिकी उन्नयन/विस्तार के लिए दीर्घकालिक ऋण और उनके व्यवसायों को कुशलतापूर्वक तथा लाभप्रद रूप से चलाने के लिए कार्यशील पूंजी देगा।

रोजगार सृजन क्षमता और प्रभाव:

i. इन सहकारी समितियों को दी गई धनराशि से आय उत्पन्न करने वाली पूंजीगत परिसंपत्तियां सृजित होंगी और सहकारी समितियों को आवश्यक कार्यशील पूंजी तरलता प्राप्त होगी।

ii. आर्थिक लाभों के अलावा, लोकतंत्र, समानता और सामुदायिक सरोकारों के अपने सिद्धांतों के माध्यम से सहकारी समितियां सामाजिक-आर्थिक अंतर को पाटने और कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के आवश्यक साधन हैं।

iii. ऋणों की उपलब्धता, सहकारी समितियों को अपनी क्षमता बढ़ाने, आधुनिकीकरण, विविध गतिविधियां संचालन, उत्पादकता और लाभ बढ़ाने तथा अधिक रोजगार सृजित करने में सक्षम बनाएगी, जिससे कृषक सदस्यों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

iv. इसके अतिरिक्त, आधारभूत ढांचे के विकास हेतु सावधि ऋण, विभिन्न कौशल कार्यबलों में रोजगार के व्यापक अवसर भी उत्पन्न करेगा।

PIB

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