नई दिल्ली. पीआईबी
भारत में बीमा क्षेत्र सामाजिक सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभर रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत, आजीविका से जुड़े जोखिम और आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में बीमा कवरेज नागरिकों, परिवारों और व्यवसायों के लिए पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।
मुख्य बिंदु
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भारत प्रीमियम वॉल्यूम वैश्विक स्तर पर 10 वें सबसे बड़े बीमा बाजार है (स्विस री रिपोर्ट)।
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आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार घरेलू वित्तीय परिसंपत्तियों में बीमा और पेंशन फंड की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2019 में 28.6 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 29.6 प्रतिशत हो गई।
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सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) अधिनियम, 2025 के अंतर्गत बीमा में एफडीआई की सीमा बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई है।
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प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में 26.88 करोड़ नामांकन और 10.45 लाख दावे वितरित किए गए (फरवरी 2026 तक)
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने “2047 तक सभी के लिए बीमा” का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस विज़न का उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक को पर्याप्त जीवन, स्वास्थ्य और संपत्ति बीमा उपलब्ध कराना है, ताकि हर परिवार और उद्यम को जोखिम से सुरक्षा मिल सके। बीमा क्षेत्र न केवल वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि बचत और निवेश को प्रोत्साहित कर अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देता है।
वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत स्थिति
स्विस री की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने वैश्विक बीमा बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत की है। नाममात्र प्रीमियम मात्रा के आधार पर भारत दुनिया का 10वां सबसे बड़ा बीमा बाजार बन गया है। इसकी वैश्विक बाजार हिस्सेदारी 1.8 प्रतिशत दर्ज की गई।
रिपोर्ट के अनुसार बीमा की कुल पहुंच 3.7 प्रतिशत रही, जिसमें जीवन बीमा 2.7 प्रतिशत और गैर-जीवन बीमा 1 प्रतिशत शामिल है। वहीं बीमा घनत्व बढ़कर 97 डॉलर तक पहुंच गया है, जो इस क्षेत्र में बढ़ती जागरूकता और भागीदारी को दर्शाता है।
रिकॉर्ड पॉलिसियां और प्रीमियम संग्रह
वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान बीमा क्षेत्र ने उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज कीं। इस अवधि में कुल 41.84 करोड़ पॉलिसियां जारी की गईं। साथ ही 11.93 लाख करोड़ रुपये का प्रीमियम संग्रह हुआ और 8.36 लाख करोड़ रुपये के दावों का भुगतान किया गया।
इसके अलावा, 31 मार्च 2025 तक इस क्षेत्र की 74.44 लाख करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां प्रबंधन के तहत दर्ज की गईं। यह आंकड़ा बीमा क्षेत्र के बढ़ते पैमाने और नागरिकों के बढ़ते विश्वास को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
घरेलू बचत में बढ़ती हिस्सेदारी
घरेलू वित्तीय परिसंपत्तियों में भी बीमा और पेंशन फंड की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। यह हिस्सा 2018-19 में 28.6 प्रतिशत था, जो बढ़कर 2024-25 में 29.6 प्रतिशत हो गया है। यह परिवारों में बढ़ती वित्तीय जागरूकता और भविष्य की सुरक्षा के प्रति सकारात्मक सोच को दर्शाता है।
बीमा के प्रमुख प्रकार
भारत में मुख्य रूप से दो प्रकार के बीमा उपलब्ध हैं:
1. जीवन बीमा
यह बीमा मृत्यु, दुर्घटना, विकलांगता और सेवानिवृत्ति जैसी परिस्थितियों में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है।
2. गैर-जीवन बीमा
इसमें स्वास्थ्य, मोटर, गृह, अग्नि, यात्रा, फसल और देयता बीमा शामिल हैं, जो संपत्ति और व्यवसायों को नुकसान की स्थिति में आर्थिक सहायता प्रदान करते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों तक बढ़ी पहुंच
बीमा सेवाओं की पहुंच अब ग्रामीण और सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक भी तेजी से बढ़ी है। मार्च 2024 तक बीमाकर्ताओं के कार्यालयों की संख्या 21,338 थी, जो मार्च 2025 में बढ़कर 22,076 हो गई।
वहीं वितरण नेटवर्क भी तेजी से विस्तारित हुआ है। यह 2020-21 में लगभग 48 लाख था, जो 2024-25 में बढ़कर 83 लाख तक पहुंच गया। वर्तमान में देश में 74 बीमाकर्ता सक्रिय हैं, जिन्हें 83 लाख से अधिक एजेंट, पॉइंट-ऑफ-सेल्स कर्मी और संस्थागत भागीदारों का समर्थन प्राप्त है।
GST छूट से बड़ी राहत
आम नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में 22 सितंबर 2025 से व्यक्तिगत जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर GST छूट लागू की गई है। इसमें फैमिली फ्लोटर पॉलिसियां भी शामिल हैं।
इस फैसले से 18 प्रतिशत GST हटने के कारण प्रीमियम लागत में कमी आई है, जिससे बीमा अधिक किफायती और सुलभ हुआ है। इसका सबसे अधिक लाभ ग्रामीण और वंचित वर्गों को मिलने की उम्मीद है।
भारत का बीमा क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और 2047 तक “सभी के लिए बीमा” का लक्ष्य सामाजिक सुरक्षा और वित्तीय समावेशन को नई दिशा दे सकता है। बढ़ती जागरूकता, सरकारी नीतियों और GST राहत के चलते आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने की संभावना है
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