“ये संसार एक रंगमंच है, और इसमें हम सब अपना अपना किरदार निभाते हैं. ये प्रसिद्ध उद्धरण विलियम शेक्सपियर के नाटक ऐज यू लाइक इट में कहा गया था.
ये वाक्य हम सब पर लागू होता है कि क्योंकि हम सब अपनी अपनी ज़िंदगी में, अपने अपने करियर में कई तरह की वास्तविक भूमिकाएं निभाते हैं.
विश्व रंगमंच दिवस का इतिहास
दुनियाभर में रंगमंच की कला को विस्तार देने के उद्देश्य से पहली बार ये दिवस 27 मार्च 1962 को मनाया गया. इस दिन “थिएटर ऑफ नेशंस” के नाम से एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया गया था.
रंगमंच मनोरंजन का बहुत पुराना साधन है, नाटकों के माध्यम से समाज की कुरीतियों पर प्रहार किया जाता है तो वहीं लोगों को जागरूक बनाने की दिशा में रंगमंच की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. सही अर्थों में रंगमंच अपने समकालनी समाज का आईना होता है.
इस साल की विश्व रंगमंच दिवस की थीम है रंगमंच और शांति की संस्कृति. इसका अर्थ होता है कि अपनी परंपराओं से जुड़े नाटकों के जरिए हम देश दुनिया में शांति की संस्कृति की स्थापना कर सकते हैं.
थिएटर में करियर
दिल्ली में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा यानि एनएसडी की पहचान देश दुनिया में एक शानदार थिएटर संस्थान की है. यहां से पढ़कर निकले कई कलाकार आज बॉलीवुड की दुनिया में नाम कमा रहे हैं.
हमारे देश में बहुत से टैलेंटेड लोग हैं जिन्हें हमेशा सही मौके की तलाश रहती हैं. यदि आप स्कूल, कॉलेज में होने वाले नाटकों में भाग लिया है और आप थिएटर में करियर बनाना चाहते हैं तो आपको एनएसडी जैसे संस्थान में एडमिशन लेना चाहिए जहां आपकी प्रतिभा को निखारा जाता है.
इस फील्ड में चुनौतियां भी बहुत हैं क्योंकि आम तौर पर रंगमंच के कलाकारों को बहुत कम पैसे मिलते हैं. इसलिए शायद रंगमंच का सहारा लेकर कलाकार फिल्मों और टीवी की दुनिया में चले जाते हैं.
यदि आप सफल हो गए तो वहां आपको दौलत और शोहरत बहुत मिलती है फिर भी जो मूलरुप से थिएटर आर्टिस्ट है उसे सही मायनों में संतुष्टि थिएटर में काम करके ही मिलती है.



