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शारदीय नवरात्रि की आज से शुरुआत…जानिए मां के 9 रुप क्यों है ख़ास ?

नवरात्रि अर्थात नौ दिन और रात जोवी माँ के नौ रूपों को समर्पित है। मां का हर रुप अपने आप में भव्य है दिव्य है। वैसे तो देश भर में नवरात्र का पर्व बड़े ही भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाता है लेकिन गुजरात में गरबा और बंगाल में मां की पूजा अर्चना बड़े ही भव्य अंदाज में मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि मां के भव्य और दिव्य 9 रुपों का क्या महत्व है?

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नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रुपों की होती है पूजा

नई दिल्ली. हमारे देश में समय-समय पर अनेक त्योहार पर व्रत और धार्मिक अनुष्ठान आते रहते हैं। इसमें से एक नवरात्रि का विशेष महत्व है। इसमें मां दुर्गा के 9 रुपों की 9 दिनों तक पूजा-अर्चना होती है. हर दिनों मां दुर्गा के अलग-अलग अवतारों की पूजा की जाती है.

शैलपुत्री: मां दुर्गा का प्रथम रूप

नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री रुप की पूजा होती है. शैल का अर्थ होता है, वह जो अद्वितीय है, अनुपम है, अद्भुत है।

ब्रह्मचारिणी: मां दुर्गा का दूसरा रूप

नवरात्रि के दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी देवी की आराधना होती है. ब्रह्म का अर्थ है, अनंत और ब्रह्मचारिणी वह है, जो अनंतता में विचरण करती है। इसका एक दूसरा अर्थ भी है जो कि देवी माँ के कुंवारे पक्ष को दर्शाता है।  यह ऊर्जा पवित्र और अक्षत है, जो मां दुर्गा के द्वितीय रूप में दिखता है।

चन्द्रघंटा: मां का तीसरा रूप

चन्द्रघंटा का अर्थ है, चन्द्र, चाँद या वह जिसका संबंध मन से हो, वह जो मन को आनंदित करता है, वह जो सौन्दर्य का साकार रूप है। जहाँ कहीं भी आपको कुछ भी सुंदर दिखता या लगता है तो वह  देवी माँ की ऊर्जा के कारण ही है।

कूष्मांडा: मां का चौथा रूप

कूष्मांड का अर्थ है ऊर्जा का गोला, प्राण शक्ति। जब भी आप प्रचण्ड ऊर्जा या प्राण शक्ति अनुभव करते हो, तो जान लो कि यह देवी माँ, दुर्गा का ही एक रूप है।

स्कंदमाता: मां का पाँचवा स्वरूप

स्कंदमाता, माँ जैसी ऊर्जा है, वह आपकी अपनी माँ जैसी है। स्कंदमाता अर्थात्  ज्ञान के सभी छ: दर्शन शास्त्रों – न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, वेदान्त और उत्तर मीमांसा; वेदों के छ: अँग या शाखाएं या षड् दर्शन। ज्योतिष शास्त्र, संगीत, छन्द स्वरविज्ञान और बहुत से अन्य दर्शनशास्त्र, कला और विज्ञान, ज्ञान, के 64  विभिन्न विषय ये सब इसमें सम्मिलित हैं। स्कंदमाता इस सब ज्ञान की माँ हैं।

कात्यायनी: मां का छठा रूप

कात्यायनी, देवी का वह रूप है, जो चेतना के साक्षी पक्ष से उदय होती है; वह चेतना जिसमें अंतर्ज्ञान की योग्यता है।

कालरात्रि: मां का सातवाँ रूप

कालरात्रि घोर, घुप्प अँधेरी ऊर्जा है, वह गहरा स्याह पदार्थ जिसमें अनंत ब्रह्मांड समाया हुआ है, और जो प्रत्येक जीवात्मा को शांति देने वाला है। यदि आप प्रसन्न और सुखी महसूस करते हैं, तो यह रात्रि के आशीर्वाद के कारण ही है। कालरात्रि, देवी माँ का वह रूप है जो इस ब्रह्मांड से भी परे है और वह प्रत्येक हृदय और आत्मा को ढाढ़स बंधाता है।

महागौरी: मां का आठवाँ दिन रूप

महागौरी, देवी का वह रूप है, जो अति सुंदर है, जो जीवन को गति और परम मुक्ति देती है। यह आपको परम मुक्ति देने वाली है।

सिद्धिदात्री: मां का नौवाँ रूप

सिद्धिदात्री जीवन में पूर्णता और सिद्धियाँ लाती है। देवी माँ का आशीर्वाद जीवन में अनेक चमत्कार लाता है। हमारे लिए जो असंभव दिखता है, माँ उसको संभव करती है।

और अंतिम दिन अर्थात्‌ दसवें दिन विजयदशमी होती है – नवरात्रि का समापन उत्सव से होता है और आप स्वयं को भावनात्मक, आध्यात्मिक तथा बौद्धिक स्तर पर ऊर्जावान अनुभव करते हैं।

पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए देशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं दी हैं. उन्होंने सोशल मीडिया में लिखा

“नवरात्रि में आज मां शैलपुत्री की विशेष पूजा-अर्चना का दिन है। मेरी कामना है कि माता के स्नेह और आशीर्वाद से हर किसी का जीवन सौभाग्य और आरोग्य से परिपूर्ण रहे।”

नवरात्रि के पहले दिन मां की पूजा कैसे करें, इस पर देखिए हमारी ये ख़ास रिपोर्ट

 

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