📞
समाचारों और विज्ञापनों के लिए संपर्क करें News & Advertisement Enquiry
best news portal development company in india

साहित्य, फिल्म और ओटीटी में लेखक के तौर पर कैसा है करियर…बता रहे हैं लेखक, प्राध्यापक सुशील कुसुमाकर

साहित्य की दुनिया से लेकर अकादमिक दुनिया तक, फिल्मों की दुनिया से लेकर पत्रकारिता की दुनिया तक अपकी पकड़ मजबूत रखने वाले बहुआयामी प्रतिभा के धनी डॉ. सुशील कुसुमाकर ने यह जो शहर, कबूलनामा, दोस्त दोस्त ना रहा, एनाइट विद वाइफ में अपनी लेखनी के ज़रिए उन्होंने अपनी ख़ास पहचान बनाई है। उन्होंने YT NEWS9 से ख़ास बातचीत की, पेश है बातचीत के प्रमुख अंश

SHARE:

अरुणेश:
सुशील जी, बात की शुरुआत कहां से की जाए? आपका प्रोफाइल बहुत बड़ा है – आप लेखक, कवि, पत्रकार, और फिल्म लेखक भी हैं। साथ ही आपने जामिया विश्वविद्यालय में पढ़ाई की और वहां पढ़ाया भी है। सबसे पहले बताइए, क्या फीलिंग होती है जब आप वहीं जाते हैं जहां आपने पढ़ाई की हो और अब प्राध्यापक के रूप में वहां होते हैं?

सुशील:
एक लाइन में कहूं तो अच्छा लगता है। क्योंकि सब कुछ जाना-पहचाना होता है। दोस्तों और जूनियर्स के साथ दोस्ताना माहौल रहता है। कोई दूरी नहीं रहती।

अरुणेश:
बहुत अच्छा। लेकिन एक सवाल और है – कांट्रैक्चुअल प्रोफेसर्स और रेगुलर प्रोफेसर्स के बीच कैसा अनुभव रहता है? छात्रों के नजरिए से भी क्या फर्क पड़ता है?

सुशील:
सभी नहीं, लेकिन अधिकांश लोग कांट्रैक्चुअल प्रोफेसर्स को सेकंड सिटीजन की तरह देखते हैं। कुछ सपोर्ट भी करते हैं। स्टूडेंट्स को वैसे तो रेगुलर प्रोफेसर पसंद आते हैं, लेकिन रिसर्च स्कॉलर्स थोड़े दूरी बनाकर रखते हैं।

अरुणेश:
तो आपका यह अनुभव क्या बताता है कि संविदा पर शिक्षकों की नियुक्ति – क्या यह सही है या इसमें बदलाव होना चाहिए?

सुशील:
सैद्धांतिक रूप से – नहीं। संविदा पर शिक्षक रखना ठीक नहीं है। व्यवहारिक रूप से भी – क्योंकि एक साल या सेमेस्टर के लिए पढ़ाने वाले शिक्षक का अनुभव पूरी तरह स्टूडेंट्स और माहौल से जुड़ने में पूरा नहीं हो पाता।

अरुणेश- सुशील जी, बात की शुरुआत कहां से की जाए? आपका प्रोफाइल बहुत बड़ा है – आप लेखक, कवि, पत्रकार, और फिल्म लेखक भी हैं। साथ ही आपने जामिया विश्वविद्यालय में पढ़ाई की और वहां पढ़ाया भी है। सबसे पहले बताइए, क्या फीलिंग होती है जब आप वहीं जाते हैं जहां आपने पढ़ाई की हो और अब प्राध्यापक के रूप में वहां होते हैं?

सबसे ज्यादा पढ़ी गई ख़बरें

नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर सैकड़ों फैक्टरी कर्मियों ने किया हिंसक प्रदर्शन….पुलिस ने बड़ी मुश्किल से हालात पर काबू पाया…यूपी सरकार ने बनाई हाईप्रोफाइल कमेटी…कमेटी में श्रमिक संगठनों के 5 प्रतिनिधि और उद्योग संगठनों के 3 प्रतिनिधि भी शामिल…सभी पक्षों की भागीदारी से शांतिपूर्ण तरीके से निकालेंगे समाधान- सीएम योगी