नई दिल्ली. साक्षरता सभी लोगों का मौलिक मानव अधिकार है। भले ही आज हम डिजिटल युग में रह रहे हों, लेकिन आज भी हमारे देश के दूरदराज या आदिवासी इलाकों में रहने वाले कई लोग आज भी निरक्षर हैं। वे पढ़-लिख नहीं पाते.
शिक्षा और साक्षरता में क्या अंतर?
साक्षरता, शिक्षा का आधार है। 2011 की जनगणना के अनुसार, 7 वर्ष या उससे अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति, जो किसी भी भाषा को समझकर पढ़ और लिख सकता है, साक्षर माना जाता है। जो व्यक्ति केवल पढ़ सकता है, लेकिन लिख नहीं सकता, वह साक्षर नहीं है।
शिक्षित होने के लिए साक्षर होना आवश्यक है, लेकिन साक्षर होने के ही शिक्षित होना नहीं। साक्षरता बुनियादी तौर पर लिखने और पढ़ने की समझ पैदा करती है, लेकिन शिक्षा का अर्थ किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व को पूरा आकार देना और समाज-देश के प्रति शिक्षा का सार्थक उपयोग करना सिखाती है।
2011 की जनगणना के नतीजे बताते हैं कि देश में साक्षरता दर में वृद्धि हुई है। देश में साक्षरता दर 74.04 प्रतिशत है, जिसमें पुरुषों के लिए 82.14 प्रतिशत और महिलाओं के लिए 65.46 प्रतिशत है। केरल 93.91 प्रतिशत साक्षरता दर के साथ शीर्ष पर रहा, उसके बाद लक्षद्वीप (92.28 प्रतिशत) और मिज़ोरम (91.58 प्रतिशत) का स्थान रहा।
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का महत्व
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस हर साल 8 सितंबर को साल 1967 से मनाया जा रहा है। इस साल इस दिवस का उद्देश्य “डिजिटल युग में साक्षरता को बढ़ावा देना है। आज का डिजिटल युग हमारे जीवन को बहुत प्रभावित कर रहा है। डिजिटलीकरण हमारे लिखने-पढ़ने, सीखने, जीने, काम करने और सामाजिक मेलजोल के तरीकों को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों रूपों में बदल रहा है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम इसका प्रयोग कैसे करते हैं।
यूनेस्को के अनुसार, 2024 में 739 मिलियन युवा और वयस्क अभी भी बुनियादी साक्षरता से वंचित हैं इसलिए अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का महत्व बहुत अधिक बढ़ जाता है क्योंकि देश दुनिया में हर व्यक्ति को साक्षर बनाना एक बड़ा उद्देश्य है।
साक्षरता बढ़ाएगी ‘उल्लास’
भारत सरकार ‘उल्लास’ और ‘निपुण’ प्रोग्राम जैसी कई कार्यक्रमों के जरिए पूर्ण साक्षरता को पाने का लक्ष्य रखा है। उल्लास यानि ULLAS (Understanding of Lifelong Learning for All in Society)- नव भारत साक्षरता कार्यक्रम यानि न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम है।
यह केंद्र सरकार की 100 प्रतिशत साक्षरता के लक्ष्य को हासिल करने की एक महत्वपूर्ण पहल है जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार है। इसका उद्देश्य 15 साल और इससे अधिक आयु के ऐसे सभी व्यक्तिओं को साक्षरता के जरिए सशक्त बनाना है, जिन्होंने औपचारिक स्कूली शिक्षा नहीं ली है या फिर बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी है।
इसके तहत सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के निरक्षरों को कवर किया जा रहा है. वित्तीय वर्ष 2022-27 के दौरान हर साल 1 करोड़ यानि 5 साल में 5 करोड़ लोगों को साक्षर बनाया ऑनलाइन शिक्षण, अधिगम और मूल्यांकन प्रणाली (ओटीएलएएस)” का उपयोग करके साक्षर बनाया जाएगा। उल्लास ऐप को अपने स्मार्ट फोन में डाउनलोड कर सकते हैं।
साक्षरता बढ़ाने में ‘निपुण’ प्रोग्राम का योगदान
निपुण (NIPUN) का शाब्दिक अर्थ है – National Initiative for Proficiency in Reading with Understanding and Numeracy (संख्यात्मक ज्ञान के साथ, पठन में निपुणता के लिये राष्ट्रीय पहल). इस योजना की शुरूआत 5 जुलाई 2021 को हुई थी.
इसका उद्देश्य 3 से 9 वर्ष के बच्चों को लिखना-पढ़ना और संख्यात्मक ज्ञान देना है। इस योजना से बच्चों में साक्षरता दर बढ़ेगी। इस योजना के तहत लर्निंग बाई डूइंग यानि गतिविध आधारित शिक्षा प्रदान की जाती है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।



