📞
समाचारों और विज्ञापनों के लिए संपर्क करें News & Advertisement Enquiry
best news portal development company in india

आज से शुरू हो गई पवित्र सावन की शुरुआत…कांवड़ यात्रियों के रुप में उमड़ा भोले के भक्तों का सैलाब

आज से श्रावण (जिसे आम बोलचाल की भाषा में सावन कहा जाता है) मास की शुरूआत हो गई है. इसके साथ ही भगवान शंकर के भक्तों की आस्था और भक्ति से भरी कांवड़ यात्रा भी शुरु हो गई है. ये पवित्र यात्रा सावन माह की प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर महाशिवरात्रि तिथि पर खत्म होती है. आइए जानते हैं कि कांवड़ यात्रियों को किन किन बातों का ध्यान रखना होता है?

SHARE:

कावड़ यात्री

नई दिल्ली. भगवान भोले को समर्पित सावन के महीने का विशेष महत्व माना जाता है. इस पवित्र महीने में भगवान शिव की कृपा पाने के लिए शिवालयों में जाकर पूजा-पाठ करते हैं।

कब से कब तक चलेगी कावड़ यात्रा?

हर साल की तरह इस साल भी बड़ी संख्या में शिवभक्त कांवड़ यात्रा पर जाते हैं. इस साल ये कावड़ यात्रा आज यानि 11 जुलाई 2025, से शुरू हो रही है। कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु विभिन्न राज्यों से पैदल यात्रा करते हुए हरिद्वार, गंगोत्री, और गौमुख से गंगाजल भरकर अपने घरों की ओर लौट जाते हैं और अपने स्थानीय शिव मंदिरों में भगवान शंकर पर जल अर्पण करते हैं.

सावन के महीने में होने वाली कावड़ यात्रा 11 जुलाई से शुरू होकर शिवरात्रि तक चलेगी. इस साल शिवरात्रि 23 जुलाई को है. इसलिए इस साल कावड़ यात्रा का समापन 23 जुलाई को होगी।

सुरक्षा के सख्त हुए इंतजाम

हरिद्वार में हर की पौड़ी से लेकर गंगा के अन्य घाटों तक कांवड़ियों की भीड़ उमड़ रही है। इस पवित्र यात्रा के लिए दिल्ली, उत्तर प्रदेश, और उत्तराखंड में शासन और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं।

कांवड़ रूट पर सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए गए हैं। पूरे रास्ते में सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, और CCTV कैमरों से निगरानी की जा रही है। खाने-पीने की दुकानों की लगातार जांच हो रही है, और फूड एंड सेफ्टी विभाग सैंपल ले रहा है।

कावड़ यात्रा का महत्व

  • कांवड़ यात्रा शुरू करने से पहले भगवान शिव का ध्यान करके संकल्प लिया जाता है।
  • यात्रा के दौरान पवित्रता, ब्रह्मचर्य और सात्विक आहार का पालन किया जाता है।
  • भक्त गंगा नदी से जल भरते हैं और उसे कांवड़ में रखकर अपने कंधों पर उठाते हैं।
  • गंगाजल हरिद्वार, गंगोत्री, सुल्तानगंज आदि स्थानों से लिया जाकाता है।
  • ज्यादातर श्रद्धालु नंगे पांव यात्रा करते हैं।
  • यात्रा के दौरान “हर हर महादेव” और “बोल बम” के जयकारे लगाए जाते हैं।
  • गंगाजल को लेकर शिव मंदिर पहुंचकर शिवलिंग पर जल अर्पित किया जाता है।
  • कांवड़ को ज़मीन पर नहीं रखा जाता, उसे स्टैंड या सहारा देकर टिकाया जाता है।
  • यात्रा अक्सर समूह में की जाती है जिससे सहयोग और सुरक्षा बनी रहती है।
  • जल अर्पण के बाद भगवान शिव से आशीर्वाद लेकर यात्रा का समापन किया जाता है।
सबसे ज्यादा पढ़ी गई ख़बरें

नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर सैकड़ों फैक्टरी कर्मियों ने किया हिंसक प्रदर्शन….पुलिस ने बड़ी मुश्किल से हालात पर काबू पाया…यूपी सरकार ने बनाई हाईप्रोफाइल कमेटी…कमेटी में श्रमिक संगठनों के 5 प्रतिनिधि और उद्योग संगठनों के 3 प्रतिनिधि भी शामिल…सभी पक्षों की भागीदारी से शांतिपूर्ण तरीके से निकालेंगे समाधान- सीएम योगी