भारत में संवैधानिक पदों (संसद, न्यायपालिका और कार्यपालिका) से हटने के बाद शीर्ष पदाधिकारियों को सरकारी आवास/बंगला दिए जाने को लेकर कड़े और स्पष्ट नियम तय हैं। इन नियमों में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के ऐतिहासिक फैसलों और संसद/विधानसभाओं द्वारा पारित अधिनियमों के आधार पर बड़ा बदलाव आया है।
पूर्व संवैधानिक पदाधिकारियों के सरकारी बंगलों के आवंटन को लेकर मौजूदा नियमों की विस्तृत रिपोर्ट नीचे दी गई है:
पूर्व राष्ट्रपति
भारत के पूर्व राष्ट्रपतियों को सेवानिवृत्ति के बाद देश में कहीं भी जीवनभर के लिए निःशुल्क और सुसज्जित सरकारी आवास पाने का कानूनी अधिकार है।
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नियम/अधिनियम: राष्ट्रपति पेंशन नियम, 1962 (President’s Pension Rules, 1962)।
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आवास का प्रकार: यदि वह दिल्ली या किसी राज्य की राजधानी में रहते हैं, तो उन्हें केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों के समकक्ष ‘टाइप-VIII’ (Type-VIII) बंगला आवंटित किया जाता है।
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अतिरिक्त सुविधाएं: बंगले का किराया, पानी और बिजली का खर्च पूरी तरह सरकार द्वारा वहन किया जाता है। यदि किसी स्थान पर सरकारी आवास उपलब्ध नहीं है, तो सरकार किराए पर (अधिकतम 2000 वर्ग फुट लिविंग एरिया) आवास लेकर देती है।
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जीवनसाथी के लिए: राष्ट्रपति के निधन के बाद उनके जीवित जीवनसाथी को भी जीवनभर के लिए यह निःशुल्क आवास की सुविधा मिलती है。
पूर्व प्रधानमंत्री
पूर्व प्रधानमंत्रियों को भी सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी आवास की सुविधा मिलती है, लेकिन इसके नियम समय के साथ सीमित किए गए हैं।
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नियम/अधिनियम: संसद द्वारा पारित ‘विशेष सुरक्षा समूह अधिनियम’ (SPG Act) और कैबिनेट सचिवालय के दिशानिर्देश।
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अवधि व प्रकार: पद छोड़ने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री को दिल्ली में जीवनभर के लिए टाइप-VIII का सरकारी बंगला आवंटित किया जाता है।
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सुरक्षा एवं स्टाफ: उन्हें इस आवास के साथ चिकित्सा सुविधाएं और कार्यालय के लिए स्टाफ भी प्रदान किया जाता है। हालांकि, पहले उनके परिवारों को भी सुरक्षा के आधार पर लंबे समय तक आवास की सुविधा मिलती थी, लेकिन 2019 के SPG संशोधन कानून के बाद पूर्व पीएम के परिवार के लिए इसे सीमित कर दिया गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री
पूर्व मुख्यमंत्रियों के सरकारी बंगले के आवंटन को लेकर नियमों में सबसे बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आया है।
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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (2016 और 2018): ‘लोक प्रहरी’ नामक एनजीओ की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सहित सभी राज्यों के उस कानून को खारिज कर दिया था जिसके तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगला दिया जाता था। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि “पद छोड़ने के बाद मुख्यमंत्री भी एक आम नागरिक के समान है और उन्हें ताउम्र जनता के पैसे पर सरकारी बंगला देना असंवैधानिक है।”
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वर्तमान नियम: अब किसी भी राज्य में पूर्व मुख्यमंत्री को आजीवन बंगला नहीं मिल सकता। मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद (अलग-अलग राज्यों के नियमों के अनुसार) सामान्यतः 15 दिन से लेकर 6 महीने के भीतर सरकारी आवास खाली करना अनिवार्य होता है।
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अपवाद: यदि कोई पूर्व मुख्यमंत्री वर्तमान में सांसद (MP), केंद्रीय मंत्री या वर्तमान विधायक है, तो उन्हें उस वर्तमान पद की पात्रता के अनुसार ही आवास आवंटित होता है, न कि “पूर्व मुख्यमंत्री” होने के नाते।
पूर्व राज्यपाल
राज्यपाल का पद एक अत्यंत प्रतिष्ठित संवैधानिक पद है, लेकिन कार्यकाल समाप्त होने के बाद के नियम अलग हैं।
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नियम: राज्यपाल (उपलब्धियां, भत्ते और विशेषाधिकार) अधिनियम, 1982।
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आवास का नियम: जब तक कोई व्यक्ति राज्यपाल के पद पर कार्यरत है, तब तक वह ‘राजभवन’ (Raj Bhavan) का उपयोग करता है। लेकिन कार्यकाल समाप्त होते ही (या पद छोड़ते ही) उन्हें राजभवन खाली करना होता है।
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पूर्व रा होने पर: पूर्व राज्यपालों को सेवानिवृत्ति के बाद केंद्र या राज्य सरकार की ओर से स्वतः कोई स्थायी या आजीवन सरकारी बंगला आवंटित किए जाने का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है। उन्हें अपने निजी आवास में लौटना होता है।
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