नई दिल्ली. विश्व दूरसंचार और सूचना समाज दिवस हमें यह याद दिलाता है कि आधुनिक तकनीक केवल सुविधा नहीं, बल्कि विकास और सामाजिक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है।
आज ही के दिन वर्ष 1865 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ की स्थापना की गई थी। यह संयुक्त राष्ट्र की डिजिटल-प्रौद्योगिकी एजेंसी है, जो वैश्विक स्तर पर दूरसंचार और डिजिटल नेटवर्क से जुड़े मानकों एवं नीतियों पर काम करती है।
क्यों मनाया जाता है यह दिवस?
विश्व दूरसंचार और सूचना समाज दिवस का मुख्य उद्देश्य डिजिटल तकनीक की पहुंच को बढ़ाना और लोगों को इंटरनेट, मोबाइल संचार, डिजिटल सेवाओं तथा आधुनिक सूचना प्रणालियों के लाभों से जोड़ना है। यह दिवस डिजिटल डिवाइड को कम करने और तकनीक को सभी तक पहुंचाने के लिए प्रेरित करता है।
डिजिटल युग में बढ़ी दूरसंचार की भूमिका
आज के दौर में दूरसंचार केवल बातचीत तक सीमित नहीं है। ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल बैंकिंग, ई-गवर्नेंस, टेलीमेडिसिन और सोशल मीडिया जैसी सेवाएं पूरी तरह दूरसंचार नेटवर्क पर निर्भर हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भी डिजिटल संचार ने दुनिया को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
भारत में डिजिटल क्रांति
भारत में इंटरनेट और मोबाइल तकनीक के तेजी से विस्तार ने डिजिटल इंडिया अभियान को नई गति दी है। गांवों तक इंटरनेट पहुंचने से शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं की पहुंच आसान हुई है। 5G तकनीक के आने से संचार व्यवस्था और अधिक तेज तथा प्रभावी बन रही है।
क्या है इस वर्ष की थीम?
हर साल इस दिवस के लिए एक विशेष थीम तय की जाती है, जो डिजिटल तकनीक और समाज के बीच संबंधों को दर्शाती है।
इस वर्ष विश्व दूरसंचार और सूचना समाज दिवस 2026 की थीम “एक लचीली और परस्पर जुड़ी दुनिया के लिए डिजिटल जीवन रेखाओं को मजबूत करना” (Digital lifelines: Strengthening resilience in a connected world) रखी गई है। यह थीम आधुनिक दुनिया में डिजिटल नेटवर्क, इंटरनेट और दूरसंचार सेवाओं की बढ़ती आवश्यकता को दर्शाती है।
इसका उद्देश्य तकनीक के सुरक्षित, समावेशी और सतत उपयोग को बढ़ावा देना होता है। डिजिटल तकनीक के जरिए दुनिया को जोड़ने में दूरसंचार की भूमिका आने वाले समय में और भी महत्वपूर्ण होने वाली है।
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