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UGC ने प्रोफेसर्स के लिए नई फेलोशिप स्कीम किया लॉन्च…जानें रिसर्च वर्क के लिए कितनी मिलेगी ग्रांट?

UGC ने एक नई फेलोशिप योजना “फेलोशिप फॉर सुपरएनुएटेड फैकल्टी मेंबर्स” शुरू किया है। इसके तहत विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर अप्लाई कर सकेंगे। इस फेलोशिप के अंतर्गत फिलहाल हर साल 100 शिक्षकों का चयन किया जाएगा। फेलोशिप की अवधि तीन वर्ष होगी या फिर 70 वर्ष की आयु पूरी होने तक, इनमें से जो भी पहले होगा। इस दौरान चयनित शिक्षकों को रिसर्च वर्क के लिए कितनी राशि दी जाएगी, आइए जानते हैं

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नई दिल्ली। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अनुभवी शिक्षकों के ज्ञान और शोध क्षमता का लाभ उठाने के उद्देश्य से एक नई फेलोशिप योजना “फेलोशिप फॉर सुपरएनुएटेड फैकल्टी मेंबर्स” शुरू की गई है।

इस योजना के तहत विश्वविद्यालयों, संस्थानों और कॉलेजों के सेवानिवृत्त या सेवानिवृत्ति के निकट पहुंचे शिक्षकों को अपने विषय क्षेत्र में शोध कार्य जारी रखने का अवसर मिलेगा।

योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे सीनियर्स प्रोफेसर्स को प्रोत्साहित करना है जिनके पास लंबे समय का टीचिंग और रिसर्च का एक्सपीरियंस है। इस फेलोशिप के माध्यम से वे सेवानिवृत्ति के बाद भी रिसर्च वर्क कर सकते हैं।

पात्रता और आयु सीमा

इस फेलोशिप के लिए किसी विश्वविद्यालय, संस्थान या कॉलेज में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर पद पर आगामी 6 महीनों में रिटायर होने वाले या रिटायर हो चुके टीचर्स आवेदन कर सकते हैं।

इस योजना के लिए अधिकतम आयु सीमा 67 वर्ष निर्धारित की गई है। इस फेलोशिप के अंतर्गत हर वर्ष 100 शिक्षकों का चयन किया जाएगा। हालांकि, चयनित उम्मीदवारों की संख्या आयोग के निर्णय के अनुसार कम या अधिक भी हो सकती है।

फेलोशिप की अवधि

फेलोशिप की अवधि तीन वर्ष होगी या फिर 70 वर्ष की आयु पूरी होने तक, इनमें से जो भी पहले होगा। इस दौरान चयनित शिक्षकों को शोध कार्य के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता भी दी जाएगी।

रिसर्च ग्रांट

योजना के तहत चयनित शिक्षकों को 50,000 रुपये प्रतिमाह फेलोशिप प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त रिसर्च से जुड़े खर्चों के लिए 50,000 रुपये प्रतिवर्ष कंटीजेंसी ग्रांट भी दी जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना सेवानिवृत्त शिक्षकों के अनुभव और ज्ञान का उपयोग शोध और अकादमिक विकास में करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। इससे उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शोध को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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