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विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 (VBSA) लोकसभा में हुआ पेश…जानिए इस बिल का हायर एजुकेशन सिस्टम में क्या पड़ेगा प्रभाव ?

केंद्र सरकार ने हायर एजुकेशन सिस्टम में व्यापक बदलाव लाने वाले बिल Viksit Bharat Shiksha Adhishthan 2025 को लोकसभा में पेश किया है। इससे उच्च शिक्षा के मानक (Standards), नियामन (Regulatory), मान्यता (Accreditation) से जुड़े नियम बदल जाएंगे। इस बिल में UGC Act 1956, AICTE Act 1987 और NCTE Act 1993 को हटाकर एक नया एकीकृत प्रणाली लाने का प्रावधान किया गया है। इस बिल का समर्थन और विरोध दोनों ही हो रहा है, ऐसे में आइए जानते हैं कि इस बिल का हायर एजुकेशन सिस्टम में क्या सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा?

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नई दिल्ली. एजुकेशन डेस्क। सरकार 2047 तक विकसित भारत बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसके लिए शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन करने की आवश्यकता को देखते हुए सरकार पहले नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी2020) लेकर आई और अब विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 (VBSA) जिसे लोकसभा में पेश किया गया है। सरकार इस बिल का पुरज़ोर समर्थन कर रही है तो वहीं विपक्ष विरोध कर रहा है।
ज्वाइंट पार्लियामेंट कमेटी को भेजा गया बिल
इस बिल को केंद्रीय कैबिनेट ने 12 दिसंबर को मंजूरी दी है और इसके बाद संसद के इसी शीतकालीन सत्र में पेश किया। इसके बारे में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा है कि ये बिल संस्थागत स्वायत्तता, मान्यता तथा गुणवत्ता को मजबूती देगा।
इस बिल से शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देगा। यह विधेयक विकसित भारत के लिए मजबूत उच्च शिक्षा की व्यवस्था को सुनिश्चित करेगी। वहीं इस बिल का विपक्ष विरोध कर रहा है।इसको देखते हुए विधेयक को ज्वाइंट पार्लियामेंट कमेटी (जेपीसी) समिति को भेज दिया गया है।
इस बिल से क्या होगा बदलाव?
इस बिल के तहत सबसे बड़ा बदलाव ये होगा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), सम्पूर्ण भारत तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE)  जैसी संस्थाएं समाप्त हो जाएंगी और इनकी जगह पर हॉयर एजुकेशन के लिए एक नया और बड़ा रिगुलेटरी अथॉरिटी बनेगी जो कि  यूनीवर्सिटीज और इंस्टीट्यूट्स और कॉलेजेज के संचालन, मान्यता और गुणवत्ता की निगरानी करेगी। इसके लिए नियमों में एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकेगी।
  • नियामक परिषद (Regulatory Council): यह काउंसिल सभी कॉलेज और यूनिवर्सिटी के नियम और संचालन की निगरानी करेगी। यह देखेगी कि संस्थान निर्धारित नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं।
  • मान्यता परिषद (Accreditation Council): यह काउंसिल शैक्षिक संस्थानों की मान्यता और गुणवत्ता तय करेगी। हॉयर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स को निर्धारित उच्च मानकों के अनुरूप मूल्यांकन किया जाएगा जिसके आधार पर ग्रेडिंग की जाएगी।
  • मानक परिषद (Standards Council): यह काउंसिल विभिन्न विषयों के कोर्स करिकुलम और सिलेवस को आधुनिक शैक्षणिक मानक के अनुसार तय किया जाएगा। साथ ही में ये काउंसिल ये भी देखेगी कि सभी संस्थानों में पढ़ाई का स्तर एक समान हो और  स्डूटेंट्स को आवश्यक थ्यौरिटिकल और प्रैक्टिकल नॉलेज मिलेगा ।

ये बिल एनईपी 2020 के अनुसार हायर एजुकेशन संस्थानों को मल्टी-डिसिप्लिनरी एजुकेशन और रिसर्च में बदलने के लिए रोडमैप तैयार करेगा वहीं ये विधेयक भारत को विश्वभर के छात्रों के लिए Best Education Destination बनाने के लिए प्लान डिवलेप करेगा।

किन संस्थानों पर लागू होगा क़ानून?

ये क़ानून सभी सेंट्रल और स्टेट यूनीवर्सिटिज, डीम्ड यूनिवर्सिटी, ऑनलाइन और डिस्टैंस लर्निंग,  IIM, IIT, NIT और अन्य कॉलेज
शामिल हैं वहीं इस बिल में मेडिकल, लॉ, फार्मेसी और नर्सिंग सीधे तौर पर भले ही शामिल नहीं हों लेकिन इस बिल के तहत मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।

फर्जी संस्थानों पर लगेगी रोक

यूजीसी हर साल फेक यूनीवर्सिटीज की लिस्ट जारी करता है। इस बिल में फर्जी संस्थानों पर रोक लगाने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं । सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को नियमों का शख्ती से पालन करना होगा।

केंद्र सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा, संस्थानों की अपनी स्वतंत्रता पर असर पड़ेगा और राज्य सरकारों की ओर से चलाए जा रहे विश्वविद्यालयों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा।

इस बिल के बारे में सरकार का कहना है कि इससे उच्च शिक्षा व्यवस्था बेहतर होगी, आधुनिक होगी। साथ ही शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगा जिससे शिक्षा गुणवत्तापूर्ण बनेगी।

वहींं इस बिल का विरोध करने वालों का कहना है कि इस बिल में केंद्र सरकार शैक्षिक संस्थानों की स्वायत्ता। राज्य सरकारों का रोल कम हो जाएगा।

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