इस बिल से क्या होगा बदलाव?
- नियामक परिषद (Regulatory Council): यह काउंसिल सभी कॉलेज और यूनिवर्सिटी के नियम और संचालन की निगरानी करेगी। यह देखेगी कि संस्थान निर्धारित नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं।
- मान्यता परिषद (Accreditation Council): यह काउंसिल शैक्षिक संस्थानों की मान्यता और गुणवत्ता तय करेगी। हॉयर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स को निर्धारित उच्च मानकों के अनुरूप मूल्यांकन किया जाएगा जिसके आधार पर ग्रेडिंग की जाएगी।
- मानक परिषद (Standards Council): यह काउंसिल विभिन्न विषयों के कोर्स करिकुलम और सिलेवस को आधुनिक शैक्षणिक मानक के अनुसार तय किया जाएगा। साथ ही में ये काउंसिल ये भी देखेगी कि सभी संस्थानों में पढ़ाई का स्तर एक समान हो और स्डूटेंट्स को आवश्यक थ्यौरिटिकल और प्रैक्टिकल नॉलेज मिलेगा ।
ये बिल एनईपी 2020 के अनुसार हायर एजुकेशन संस्थानों को मल्टी-डिसिप्लिनरी एजुकेशन और रिसर्च में बदलने के लिए रोडमैप तैयार करेगा वहीं ये विधेयक भारत को विश्वभर के छात्रों के लिए Best Education Destination बनाने के लिए प्लान डिवलेप करेगा।
किन संस्थानों पर लागू होगा क़ानून?
ये क़ानून सभी सेंट्रल और स्टेट यूनीवर्सिटिज, डीम्ड यूनिवर्सिटी, ऑनलाइन और डिस्टैंस लर्निंग, IIM, IIT, NIT और अन्य कॉलेज
शामिल हैं वहीं इस बिल में मेडिकल, लॉ, फार्मेसी और नर्सिंग सीधे तौर पर भले ही शामिल नहीं हों लेकिन इस बिल के तहत मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।
फर्जी संस्थानों पर लगेगी रोक
यूजीसी हर साल फेक यूनीवर्सिटीज की लिस्ट जारी करता है। इस बिल में फर्जी संस्थानों पर रोक लगाने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं । सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को नियमों का शख्ती से पालन करना होगा।
केंद्र सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा, संस्थानों की अपनी स्वतंत्रता पर असर पड़ेगा और राज्य सरकारों की ओर से चलाए जा रहे विश्वविद्यालयों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा।
इस बिल के बारे में सरकार का कहना है कि इससे उच्च शिक्षा व्यवस्था बेहतर होगी, आधुनिक होगी। साथ ही शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगा जिससे शिक्षा गुणवत्तापूर्ण बनेगी।
वहींं इस बिल का विरोध करने वालों का कहना है कि इस बिल में केंद्र सरकार शैक्षिक संस्थानों की स्वायत्ता। राज्य सरकारों का रोल कम हो जाएगा।



