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अयोध्या में श्रीराम जन्‍मभूमि मंदिर के शिखर पर पीएम मोदी ने किया ध्‍वजारोहण…जानिए राम को काल्पनिक बताने वालों के बारे में क्या कहा?

अयोध्या धाम में बन रहे भव्य और दिव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर ध्वाजारोहण हो गया है जो मंदिर के निर्माण कार्य के आपचौरिक तौर पर पूरा होने का प्रतीक है। पीएम मोदी और आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने भगवा रंग के ध्वज को फहराया। आइए जानते हैं कि इस मौके पर पीएम मोदी ने राम को काल्पनिक बताने वालों के बारे में क्या कहा?

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PC- Agency

अयोध्या. (एजेंसी)

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में पीएम मोदी ने अभिजीत मुहूर्त ने मंदिर के शिखर पर धवजारोहण किया. जैसे ही ध्वजा फहराया गया, पूरा मंदिर परिसर जय श्री राम के नारों से गुंज उठा। इससे पहले प्रधानमंत्री ने सरसंघचालक मोहन भागवत के मंदिर के गर्भगृह में जाकर भगवान राम के दर्शन किया।

क्या संदेश देता है धर्मध्वज?

भगवा रंग का धर्मध्वज 10 फीट ऊँचा और 20 फीट लंबा है जो कि समकोण त्रिभुजाकार में है। ये ध्वज मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के तेज और पराक्रम का प्रतीक है। धर्मध्वज में तेजस्वी सूर्य की छवि है और  कोदंड यानि कोविदारा वृक्ष की छवि अंकित है। इसके बीच में ‘ॐ’ चिह्न सुशोभित है।

यह ध्वज विजय, श्रद्धा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है जो कि गरिमा, एकता और सांस्कृतिक निरंतरता का संदेश देता है। पीएम मोदी ने कहा कि धर्मध्वज भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का प्रतीक है। ध्वज का भगवा रंग, इस पर रची सूर्यवंश की ख्याति वर्णित ओम शब्द और वृक्ष राम राज्य की कीर्ति को प्रतिरूपित करता है. ये ध्वज संकल्प है, ये धवज सफलता है. ये ध्वज संघर्ष से सृजन की गाथा है.  य

मानसिक गुलामी की मानसिकता से मुक्ति जरूरी- पीएम

पीएम मोदी ने इस मौके पर कहा कि भारतीय नौसेना के ध्वज से गुलामी की मानसिकता को हटाया गया है। कांग्रेस का नाम लिए बगैर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मानसिक गुलामी के चलते ही भगवान राम को काल्पनिक कहा गया। उन्होंने आने वाले 10 साल में हम मैकाले की गुलामी से छुटकारा पाने का संकल्प लें। 21वीं सदी की अयोध्या विकसित भारत का मेरुदंड बनकर उभर रही है।

पीएम मोदी ने कहा कि आज से 190 साल पहले 1835 में मैकाले नाम के एक अंग्रेज ने भारत में मानसिक गुलामी की नींव रखी। आने वाले 10 वर्षों में उशके 200 साल होने वाले हैं। हमने संकल्प लिया है कि आने वाले 10 वर्षों में हम मानसिक गुलामी की मानसिकता से मुक्ति दिलाकर रहेगें।

पीएम मोदी ने कहा, अयोध्या वह पवित्र भूमि है, जहां आदर्श आचरण में बदलते हैं। यह वही भूमि है, जहां राम ने जीवन शुरू किया। इसी धरती ने बताया कि एक व्यक्ति अपने समाज की शक्ति से कैसे मर्यादा पुरुषोत्तम बनता है, जब भगवान यहां से गए तो युवराज राम थे, वह लौटे तो मर्यादा पुरुषोत्तम बनकर लौटे। राम मंदिर का दिव्य प्रांगण भारत के चेतना स्थली बन रहा है। यहां माता शबरी का मंदिर है, जो जनजातीय समाज के प्रेम प्रेरणा की मूर्ति हैं, निषाद राज, माता अहिल्या, महर्षि वाल्मीकि, संत तुलसीदास, जटायु, गिलहरी की मूर्तियां भी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सप्तमंदिर भी पहुंचें और महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, देवी अहिल्या, महर्षि वाल्मीकि, महर्षि अगस्त्य, निषादराज गुहा और माता शबरी से जुड़े मंदिर के दर्शन भी किए हैं।

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