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भूकंप से हड़कंप: दिल्ली में सुबह 9 बजे आया भूकंप…बारिश, ट्रैफिक और भूकंप ने बढ़ाई परेशानी..जानिए क्या हैं भूकंप से बचने के लिए NDMA की गाइडलाइंस?

दिल्ली-एनसीआर, में रहने वाले लोगों के लिए आज की सुबह परेशानी भरी रही. भारी बारिश के बीच तेज भूकंप से लोग हैरान दिखे। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, ये भूकंप सुबह 9 बजकर 5 मिनट के आसपास आया. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.4 रही. इसका मतलब हुआ इसकी गहराई लगभग 10 किलोमीटर. आइए जानते हैं कि इस भूकंप का केंद्र कहां पर था?

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प्रतीकात्मक चित्र PC- File

नई दिल्ली. उत्तर भारत के दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में आज सुबह भूकंप आया. इसके तेज झटके महसूस किए गए. ये भूकंप सुबह 9 बजे के आसपास आया जब कई लोग अपने आफिस जाने वाले रास्ते पर थे. एक तो तेज बारिश हो रही थी, जिसके कारण ट्रैफिक जाम भी बहुत था ऊपर से भूकंप आया. ऐसे में लोग हैरान और परेशान दिखे।

कहां था भूकंप का केंद्र?

 नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र हरियाणा के झज्जर जिले में था . तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.4 दर्ज की गई जो कि सामान्य तौर पर दिल्ली में आने वाले भूकंप की तीव्रता से कहीं अधिक थी. भूकंप के तेज झटकों के कारण लोग डर गए और घबराकर अपने घरों और ऑफिस से बाहर निकल आए.

ये भूकंप आज सुबह लगभग 9:04 बजे आया. इसकी गहराई लगभग 10 किलोमीटर रही. हरियाणा के गुरूग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. इसके अलावा, यूपी के नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और हापुड़ में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए.
भूकंप के संवेदनशील जोन IV में आता है दिल्ली
वैसे तो दिल्ली एनसीआर में समय-समय पर हल्के भूकंप की घटनाएं होती रहती हैं लेकिन भूकंप का केंद्र अक्सर दिल्ली से काफी दूर रहता है जैसे कि अफगानिस्तान या पाकिस्तान. दिल्ली भूकंप के लिहाज से संवेदनशील जोन IV में आता है. जिसके कारण राजधानी में हल्के या मध्यम तीव्रता के भूकंप आने की संभावना बनी रहती है.

भूकंप से कैसे बचें

राष्ट्रीय प्रबंधन आपदा प्राधिकरण यानि एनडीएमए ने भूकंप के दौन क्या करें क्या न करें, इस बारे में एक गाइडलाइंस तय की है. इसके मुताबिक आप यदि घर के अंदर हों तो जमीन पर झुक जाए, किसी मजबूत मेज अथवा फर्नीचर के किसी हिस्से के नीचे बैठे जााएं. तब तक मजबूती से पकड़कर बैठे रहें जब तक कि भूकंप के झटके न रुक जाएं। यदि आपके पास कोई मेज या डेस्क न हो तो अपने चेहरे तथा सिर को अपने बाजुओं से ढक लें और बिल्डिंग के किसी कोने में झुक कर बैठ जाएं। किसी कमरे के कोने में, किसी मेज अथवा यहां तक कि किसी पलंग के नीचे रुककर अपने आपको बचाएं।

वहीं यदि आप घर के बाहर हों तो जहां हों वहीं रहें। बिल्डिंग, पेड़ों, स्ट्रीट लाइटों और गैस, बिजली, टेलीफोन आदि की तारों आदि से दूर रहें। यदि आप किसी खुली जगह पर हों तो वहां तब तक रुके रहें जब तक कि भूकंप के झटके न रुक जाएं। सबसे बड़ा खतरा बिल्डिंग के बाहर, निकास द्वारों तथा इसकी बाहरी दीवारों के पास होता है। भूकंप से संबंधित ज्यादातर दुर्घटनाएं दीवारों के गिरने, टूटकर गिरने वाले कांच तथा गिरने वाली वस्तुओं के कारण होती हैं। इसलिए सावधान रहें

वहीं यदि किसी गाड़ी में हों तो जितनी जल्दी संभव हो चलती गाड़ी रोककर उसी के अंदर बैठे रहें। बिल्डिंग, पेड़ों, ओवरपास, बिजली/टेलीफोन आदि की तारों के पास या उसके नीचे नहीं रुकना चाहिए। सावधानी से भूकंप के रुकने के बाद आगे बढ़ें. सड़कों, पुलों, रैम्प से बचें जो भूकंप द्वारा क्षतिग्रस्त हुए हो सकते हैं।

तैयार रखें इमरजेंसी किट 

एक इमरजेंसी किट बनाकर तैयार रखें जिसमें अतिरिक्त बैटरियों सहित बैटरी चालित टॉर्च, बैटरी चालित रेडियो रखें . इसके अलावा आपातकालीन खाद्य सामग्री जैसे कि ड्राई फ्रूट्स, पीने का पानी (पैक्ड), एक वाटरप्रूफ कंटेनर में मोमबत्तियों तथा माचिस, क्लोरीन की गोलियां तथा पाउडर-युक्त वाटर प्यूरिफायर, जरूरी दवाइयां, कैश और डेबिट- क्रेडिट कार्ड, मोटी रस्सी तथा डोरियां, मजबूत जूते आदि.

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