नई दिल्ली. भारत सरकार ने विश्व के प्रमुख देशों में अपने सांसदों को भेजने का महत्वपूर्ण रणनीतिक और कूटनीतिक फैसला किया है. सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ऑपरेशन सिंदूर के बारे में भारत का पक्ष दुनिया के सामने रखेंगे और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की पोल खोलेंगे.
मई के आखिरी में होगा सांसदों का दौरा
भारत, आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई के लिए दुनिया भर से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है. आतंकवाद के प्रायोजक देश पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग किया जाएगा.
केंद्र सरकार ने कहा है कि सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल इस महीने के आखिर में अलग-अलग देशों का दौरा करेंगे. इन में से तीन प्रतिनिधिमंडलों की अगुवाई विपक्षी नेता करेंगे, जिनमें कांग्रेस के शशि थरूर, एनसीपी(शरद पवार) सांसद सुप्रिया सुले और डीएमके की सांसद कनिमोझी शामिल हैं.
ये प्रतिनिधिमंडल इस महीने के आखिर में यूरोप के कई देशों से लेकर मुस्लिम देशों का दौरा करेंगे, इन देशोंं में सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानि यूएनएससी के सदस्य देश भी शामिल हैं.
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर सरकार का बयान साझा करते हुए लिखा, “सबसे अहम पलों में भारत एकजुट खड़ा है. सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही अहम साझेदार देशों का दौरा करेंगे और आतंकवाद के प्रति जीरो टोलरेंस का हमारा साझा संदेश ले जाएंगे. यह राजनीति से ऊपर, मतभेद से परे, राष्ट्रीय एकता की ताकतवर झलक है.”
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
सरकार के इस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के ऐलान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी ने जो चार नाम दिए थे उनमें से आनन्द शर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री, गौरव गोगोई, डॉ सैयद नसीर हुसैन, राज्यसभा सांसद और राजा बराड़, लोकसभा सांसद. शामिल थे लेकिन सरकार ने इनमें से एक भी नाम शामिल नहीं किया.
मोदी सरकार ने कांग्रेस नेता शशि थरूर को प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया है. इस पर शशि थरूर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये उनके लिए सम्मान की बात है. आतंकवाद के खिलाफ वे देश का रूख अपने विदेशी दौरे के दौरान करेंगे.
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