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होली से जुड़ी प्रचलित हैं ये लोककथाएं…जानिए होली का त्योहार हमको क्या सिखाए ?

होली सिर्फ रंगों भर का त्योहार नहीं है बल्कि ये आस्था, परंपरा और लोकजीवन से जुड़ी कई कथाओं का उत्सव है। हर साल फाल्गुन महीने की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह त्योहार सामाजिक समरसता का प्रतीक है। आइए जानते हैं कि होली के उत्सव के पीछे कौन कौन सी प्रमुख लोककथाएं प्रचलित हैं और हम उनसे क्या सीख सकते हैं ।

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PC- AI
रंगों के महापर्व होली का त्योहार एक वैश्विक त्योहार बन गया है जो केवल हमारे देश में नहीं बल्कि विदेशों में भी बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिक भी मुख्य रूप से इस त्योहार को मनाते हैं।
भारत के साथ-साथ नेपाल, फिजी, गुयाना, सुरीनाम, मलेशिया, बांग्लादेश, पाकिस्तान, मॉरीशस, अमेरिका, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका जैसे कई देशों में भारतीय प्रवासियों द्वारा होली का त्योहार बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है।
प्रह्लाद और होलिका की कथा
होली की सबसे प्रसिद्ध कथा प्रह्लाद और होलिका से संबंधित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार असुर राजा हिरण्यकशिपु स्वयं को ईश्वर मानता था और चाहता था कि सभी उसकी पूजा करें। किंतु उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था। क्रोधित होकर हिरण्यकशिपु ने अपनी बहन होलिका की सहायता से प्रह्लाद को अग्नि में जलाने की योजना बनाई।
होलिका को वरदान था कि अग्नि उसे जला नहीं सकती। वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गया और होलिका स्वयं अग्नि में भस्म हो गई। इसी घटना की स्मृति में होलिका दहन की परंपरा प्रचलित हुई, जो बुराई के अंत और सत्य की विजय का संदेश देती है।
राधा-कृष्ण और रंगों की परंपरा
होली का दूसरा प्रमुख प्रसंग राधा और कृष्ण से जुड़ा है। मान्यता है कि बाल्यकाल में कृष्ण अपने श्याम वर्ण को लेकर चिंतित रहते थे। तब उनकी माता यशोदा ने उन्हें राधा के मुख पर रंग लगाने का सुझाव दिया। इसी प्रसंग से रंग खेलने की परंपरा की शुरुआत मानी जाती है।
विशेषकर वृंदावन और मथुरा में होली का उत्सव अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है। यहाँ की लठमार होली और फूलों की होली विश्वप्रसिद्ध हैं, जो प्रेम और उल्लास का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
कामदेव और शिव की कथा
एक अन्य कथा के अनुसार, जब शिव गहन तपस्या में लीन थे, तब देवताओं ने उनकी तपस्या भंग करने के लिए कामदेव को भेजा। कामदेव ने अपने पुष्पबाण से शिव की तपस्या भंग करने का प्रयास किया, जिससे क्रोधित होकर शिव ने उन्हें भस्म कर दिया।
बाद में रति के आग्रह पर शिव ने कामदेव को पुनर्जीवित किया। इस कथा को भी होली से जोड़कर देखा जाता है, जो प्रेम और पुनर्जन्म के प्रतीक के रूप में व्याख्यायित होती है।
सामाजिक समरसता की सीख
इन लोककथाओं से पता चता है कि होली का पर्व भक्ति भाव और संस्कृति-परंपरा से जुड़ा त्योहार है जो हमें विविधता में एकता का संदेश देता है और सामाजिक समरसता की सीख भी देता है।
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