नई दिल्ली। हमारे देश में 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ था। इसके साथ ही भारत एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बना। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में हर वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।
गणतंत्र दिवस 2026 हमें हमारे संवैधानिक अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों की याद दिलाता है। यह दिन समानता, न्याय और स्वतंत्रता के सिद्धांतों को मजबूत करने का अवसर भी है।
गणतंत्र दिवस परेड का मुख्य आकर्षण
नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य गणतंत्र दिवस परेड 2026 समारोह का मुख्य आकर्षण रही। राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद तीनों सेनाओं थल सेना, नौसेना और वायु सेना ने अपनी शक्ति, अनुशासन और आधुनिक तकनीक का प्रदर्शन किया।
स्वदेशी रक्षा उपकरणों और अत्याधुनिक सैन्य क्षमताओं ने “आत्मनिर्भर भारत” की अवधारणा को सशक्त रूप में प्रस्तुत किया। वायु सेना का फ्लाईपास्ट दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा।
परेड में तीनों सेनाओं ने अपनी ताकत दिखाई। एयरफोर्स के राफेल, जगुआर, मिग 29, सुखोई समेत 29 एयरक्रॉफ्ट शामिल हुए। इन्होंने सिंदूर, वज्रांग, अर्जन और प्रहार फॉर्मेशन बनाए।
सेनाओं ने मिसाइलें, बैटल एयरक्राफ्ट, नई बटालियन और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल घातक वेपन सिस्टम का प्रदर्शन किया गया। इनमें ब्रह्मोस और आकाश वेपन सिस्टम, रॉकेट लॉन्चर सूर्यास्त्र, मेन बैटल टैंक अर्जुन और स्वदेशी मिलिट्री प्लेटफार्मों और हार्डवेयर की सीरीज शामिल थीं।
झांकियों में दिखी राष्ट्रभक्ति की शक्ति
गणतंत्र दिवस 2026 की झांकियाँ भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती रहीं। इस बार के गणतंत्र दिवस की थीम वंदे मातरम थी क्योंकि इस साल राष्ट्रगान वंदे मातरम के 150 साल पूरे हुए हैं।
देश के अलग-अलग राज्यों और मंत्रालयों की 30 से ज्यादा झाकियां शामिल हुईं। इनमें 2,500 कलाकार शामिल हुए जिसमें विभिन्न लोककलाओं, परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया। स्कूली बच्चों और एनसीसी कैडेट्स की सहभागिता ने कार्यक्रम में अनुशासन और ऊर्जा का संचार किया।
समारोह में 900 किमी प्रति घंटे से रफ्तार से राफेल ने उड़ान भरी तो वहीं C-130 और C-295 ने भी अपनी ताकत दिखाई और स्वदेशी हाइपरसोनिक मिसाइल की पहली झलक भी देखने को मिली।
ऑपरेशन सिंदूर के वक्त इस्तेमाल किए गए गए इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल सेंटर की झांकी निकाली गई। यह ऑपरेशन सिंदूर के संचालन को संक्षेप में दिखाता है।
समारोह में पहली बार दो मुख्य अतिथि, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन शामिल हुए। लगभग 97 मिनट की परेड में अलग-अलग राज्यों और मंत्रालयों की 30 झांकियां दिखाई गईं।
कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, गृह मंत्री अमित शाह और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद थे।



