नयी दिल्ली. धर्म कर्म डेस्क
महाशिवरात्रि के पर्व के बारे में धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह इसी दिन हुआ था। इस दिन पूजन पाठ व्रत जरुर करना चाहिए. जो अविवाहित कन्याएं हैं उनको व्रत रखना चाहिए इससे उनको और मन मुताबिक पति मिलता है और वहीं पर जो विवाहित महिलाएं हैं अगर उनके घर कोई घरेलू कलह है तो वह भी इस व्रत को रखने से दूर होती है।
महाशिवरात्रि के व्रत का विशेष महत्व है। धार्मिक गुरूओं के मुताबिक, इस व्रत से आपकी कुंडली के दोष दूर होते रहते हैं। इसके अलावा अगर आप मानसिक रूप से अशांत है या आपका स्वास्थ्य अच्छा नहीं है कि तो महाशिवरात्रि पर पूजा-पाठ और व्रत रखने से आपको सभी रोगों से आपको मुक्ति मिलेगी।
भगवान के शिवलिंग में बेलपत्र चढ़ाने से मान्यता है कि जिस पर आपको व्यापार में उन्नति मिलती है इससे आपके करियर में सफलता मिलती है और आपको सामाजिक प्रतिष्ठा मिलती है अब यहां पर यह भी एक मान्यता है कि इस दिन हुए देर भक्तों को भगवान भोले के भक्तों को रात का जागरण करना चाहिए।
महाशिवरात्रि से जुड़ी कथाएं
महाशिवरात्रि से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। शिव पुराण के मुताबिक इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था इस तरह से देखा जाए तो भगवान भोले ने इसी दिन गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया। भगवान शंकर वैराग्य से लेकर गृहस्थ तक के धर्म के बारे में अपने भक्तों को बड़ी सीख देते हैं।
एक अन्य कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले विष “हलाहल” को भगवान शिव ने इसी रात ग्रहण किया था, जिससे संसार की रक्षा हो सकी। इस कारण उन्हें “नीलकंठ” कहा जाता है। महाशिवरात्रि का यह प्रसंग त्याग, करुणा और लोककल्याण का प्रतीक है।
महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व
महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। इस दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करते हैं। विशेष रूप से काशी विश्वनाथ मंदिर, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और केदारनाथ मंदिर जैसे प्रमुख शिवधामों में भव्य आयोजन होते हैं।
मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। अविवाहित युवतियां योग्य वर की प्राप्ति के लिए तथा विवाहित महिलाएं सुखी दांपत्य जीवन के लिए व्रत रखती हैं।
महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व भी है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह माना जाता है कि इस रात्रि में ग्रहों और ऊर्जा का विशेष संतुलन होता है, जो साधना के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। योग और ध्यान करने से मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है।
यह पर्व संयम, साधना और आंतरिक शुद्धि का संदेश देता है। वर्तमान समय में जब जीवन भागदौड़ और तनाव से भरा हुआ है, महाशिवरात्रि आत्मचिंतन और आध्यात्मिक संतुलन का अवसर प्रदान करती है।
महाशिवरात्रि का पर्व हमें आत्मा के जागरण के माध्यम से शिव रूपी परमात्मा में ध्यान लगाने का मौका देता है. इस पावन अवसर पर श्रद्धा, विश्वास और भक्ति के साथ की गई आराधना व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक ले जा सकती है और हमारे जीवन को सफल बना सकती है।
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