नई दिल्ली. करियर डेस्क।
EdCIL (India) लिमिटेड एजुकेशन मिनिस्ट्री के अंतर्गत आने वाली एक मिनी रत्न श्रेणी-1 सीपीएसई है, जो भारत और विदेशों में शिक्षा और शिक्षा मंत्रालय के सभी क्षेत्रों में प्रबंधन और परामर्श सेवाएं प्रदान करती है। संस्थान ने अप्रेंटिसशिप के लिए योग्य और पात्र उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। पात्र और इच्छुक उम्मीदवार 2 जनवरी 2026 से लेकर अंतिम तिथि 19 जनवरी 2026 तक अप्लाई कर सकते हैं। चयनित उम्मीदवार के कार्य की समीक्षा हर 3 महीने में की जाएगी और संतोषजनक प्रदर्शन पर अप्रेंटिसशिप सर्टिफिकेट मिलेगा।
पद- अप्रेंटिसशिप
अप्रेंटिसशिप की अवधि– 1 साल
पदों की संख्या- 15
आवश्यक योग्यता – इसके लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से बीटेक की डिग्री IT या CS या ECE में होनी चाहिए वहीं B.Com, CA, BBA BA (HRM), BA (सोशलॉजी या अंग्रेजी) की डिग्री रखने वाले छात्र भी आवेदन कर सकते हैं।
आयु सीमा- इस अप्रेंटिसशिप भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 25 वर्ष निर्धारित की गई है।
कितना मिलेगा स्टाइपेंड?- अप्रेंटिसशिप के लिए चयनित उम्मीदवारों को15,000 रुपये प्रति माह तक का स्टाइपेंड प्रदान किया जाएगा जो अप्रेंटिसशिप अवधि के दौरान दिया जाएगा।
कैसे होगा सिलेक्शन– चयन ऑनलाइन इंटरव्यु के द्वारा किया जाएगा।
कैसे करें आवेदन?- उम्मीदवारों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए NATS यानि National Apprenticeship Promotion Scheme पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा.इसके लिए उम्मीदवार रजिस्ट्रेशन के बाद आवश्यक जानकारी भरें.आवेदन फॉर्म सबमिट करें.
इस लिंक के माध्यम से भी रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है– https://nats.education.gov.in/student_type.php.
किसी भी पूछताछ के लिए, इन फोन नंबर्स पर कॉल कर सकते हैं- +91-0120-4156001, 4156002, 4154003, 2970206, 2970207 या फिर ईमेल: hrhelpdesk@edcil.co.in कर सकते हैं।
ज्यादा जानकारी के लिए इस ऑफिशियल लिंक पर क्लिक करें-
ऑनलाइन अप्लाई करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://nats.education.gov.in/student_type.php
अप्रेंटिसशिप और इंटर्नशिप में अंतर
अप्रेंटिसशिप और इंटर्नशिप दोनों से ही प्रैक्टिकल लर्निंग और एक्सपीरियंस मिलता है लेकिन दोनों में कुछ अंतर भी होता है। अप्रेंटिसशिप मुख्य रूप से किसी टेक्निकल सब्जेक्टस, ट्रेड, इंजीनियरिंग आदि में ट्रेनिंग दी जाती है और इसकी समय सीमा इंटर्नशिप से अधिक होती है और ये भारत में कानूनी नियम अप्रेंटिसशिप एक्ट 1961 के अंतर्गत संचालित होती है जबकि इंटर्नशिप में ऐसी कोई कानूनी बाध्यता नहीं है।अप्रेंटिसशिप में उम्मीदवारों को गंभीरतापूर्वक काम सिखाया जाता है और नियमित रूप से स्टाइपेंड भी दिया जाता है, जिससे रोजगार की संभावना बढ़ जाती है जबकि इंटर्नशिप में ऐसा होना ज़रूरी नहीं होता।
वहीं इंटर्नशिप का उद्देश्य छात्रों या नए स्नातकों को किसी संगठन के कार्य वातावरण से परिचित कराना और प्रारंभिक कार्य अनुभव देना होता है। इसकी अवधि अपेक्षाकृत कम होती है और यह पढ़ाई के दौरान या बाद में की जा सकती है। इंटर्नशिप में सीखने का दायरा व्यापक होता है, लेकिन प्रशिक्षण उतना औपचारिक नहीं होता। कुछ इंटर्नशिप में स्टाइपेंड मिलता है, तो बहुत जगह नहीं भी मिलता है।



