नई दिल्ली। आज भारत अपनी ज़रूरत का लगभग 84-85% कच्चा तेल (Crude Oil) दूसरे देशों से आयात (Import) करता है। इसलिए वैश्विक बाज़ार की हलचल सीधे हमारी जेब पर असर डालती है।
भले ही इसके पीछे अमेरिका और ईरान के युद्ध का असर बताया जाता हो और ये तर्क दिया जाता हो कि कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के कारण देश में डीजल पेट्रोल की कीमत बढ़ती है तो सवाल ये भी उठता है कि जब कच्चे तेल की कीमतें घटती है तो हमारे देश में डीजल पेट्रोल की कीमतें क्यों नहीं कम होतीं।
कैसे तय होती हैं पेट्रोल और डीजल की कीमतें ?
पेट्रोल और डीजल की कीमतें ‘डायनामिक डेली प्राइसिंग मॉडल’ से तय होती है क्योंकि साल 2010 में पेट्रोल और 2014 में डीजल की कीमतों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर दिया गया था।
जून 2017 से देश में ‘डायनामिक डेली प्राइसिंग मॉडल’ शुरू किया गया था। इसके तहत ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) जैसे IOCL, BPCL और HPCL रोज़ाना सुबह 6 बजे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के पिछले 15 दिनों के औसत और डॉलर-रुपए की विनिमय दर (Exchange Rate) के आधार पर नई कीमतें जारी करती हैं।
5 चरणों में तय होती हैं कीमतें
एक लीटर पेट्रोल या डीजल की खुदरा कीमत (Retail Price) मुख्य रूप से इन 5 चरणों में तय होती है:
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कच्चे तेल की मूल लागत (Crude Oil Cost): अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से खरीदे गए कच्चे तेल की कीमत (प्रति बैरल) और उसे भारत लाने का मालभाड़ा (Freight & Insurance)। चूंकि यह भुगतान डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी बेहद अहम होती है।
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रिफाइनरी कॉस्ट (Refinery Transfer Price – RTP): कच्चे तेल को देश के भीतर मौजूद रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाने का खर्च और कंपनियों का मार्जिन।
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केंद्र सरकार का टैक्स (Excise Duty): रिफाइनरी से निकलने के बाद केंद्र सरकार इस पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) और रोड/इन्फ्रास्ट्रक्चर सेस लगाती है। यह पूरे देश में समान होता है।
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डीलर कमीशन (Dealer Commission): पेट्रोल पंप मालिकों को ईंधन बेचने और पंप के संचालन के लिए दिया जाने वाला प्रति लीटर कमीशन।
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राज्य सरकार का टैक्स (VAT/Sales Tax): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपना वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) लगाती हैं। चूंकि हर राज्य की वैट दरें अलग होती हैं, इसीलिए दिल्ली, मुंबई, पटना या लखनऊ में पेट्रोल-डीजल के दाम अलग-अलग होते हैं।
कैसे तय होती हैं एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतें ?
वहीं अगर एलपीजी गैस की कीमतों की बात करें तो इसकी कीमतें रोज़ाना नहीं बदलतीं, बल्कि तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को इसकी समीक्षा करती हैं। एलपीजी की मूल्य निर्धारण प्रणाली को इम्पोर्ट पैरिटी प्राइस (Import Parity Price – IPP) कहा जाता है।
एलपीजी की कीमत मुख्य रूप से इन कारकों पर निर्भर करती है:
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सऊदी अरामको कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (Saudi Aramco CP): सऊदी अरामको दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में से एक है। इसके द्वारा तय की जाने वाली प्रोपेन और ब्यूटेन (एलपीजी के मुख्य घटक) की अंतरराष्ट्रीय कीमतें ही वैश्विक बेंचमार्क मानी जाती हैं।
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समुद्री मालभाड़ा और कस्टम ड्यूटी: गैस को भारत के बंदरगाहों तक लाने का समुद्री किराया, बीमा और भारत सरकार द्वारा लगाया जाने वाला सीमा शुल्क।
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घरेलू बॉटलिंग और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च: बंदरगाहों से गैस को देश के अलग-अलग बॉटलिंग प्लांट तक पहुंचाना, सिलेंडरों में भरना (Bottling) और वहां से गैस एजेंसियों तक भेजने का ट्रांसपोर्ट खर्च।
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डीलर कमीशन और जीएसटी (GST): एलपीजी को पेट्रोल-डीजल की तरह जीएसटी से बाहर नहीं रखा गया है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर 5% GST लगता है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर पर यह दर ज़्यादा होती है। इसके साथ ही गैस एजेंसी के मालिक का कमीशन जोड़ा जाता है।
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मंहगाई से राहत दे सकती हैं केंद्र और राज्य सरकार
आपको जानकार हैरानी होगी कि जब आप एक लीटर पेट्रोल खरीदते हैं, तो उसकी सच में मूल कीमत (Basic Cost) बहुत कम होती है लेकिन लगभग 40% से 50% फीसदी केंद्र और राज्य सरकारें टैक्स लगा देती हैं जिसकी वजह से कीमत बढ़ जाती है। अगर सरकारें कुछ टैक्स घटा दें तो भी आम लोगों को महंगाई से राहत मिल सकती हैं।
वहीं दूसरी तरफ अगर केंद्र सरकार तेल की कीमतों को GST के दायरे में ले आए तो भी लोगों को राहत मिल सकती है। दरअसल जब 2017 में देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया गया था, तब राज्यों के कड़े विरोध के कारण पेट्रोलियम उत्पादों (पेट्रोल, डीजल, कच्चा तेल, विमान ईंधन यानी ATF और प्राकृतिक गैस) को इससे अलग रखने का फैसला किया गया था लेकिन अगर केंद्र और राज्य सरकारों को सहमति बनाकर मिलकर इसे GST के दायरे में लाना चाहिए।
विशेषत्रों की मानें अगर केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर जीएसटी के दायरे में लाने पर सहमत हो जाती हैं, तो पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक समान (One Nation, One Tax) हो जाएंगी। इससे कीमतों में लगभग 20-30 रुपए प्रति लीटर कम हो सकती हैं
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