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इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) में चयन प्रक्रिया में हुआ सुधार…जानिए क्या हुआ बदलाव?

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में चयन प्रक्रिया को अब और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और योग्यता आधारित बनाया जाएगा। ICAR में चयन प्रक्रिया में व्यापक सुधार किए गए हैं। आइए जानते हैं कि किस तरह के बदलाव किए गए हैं

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नई दिल्ली, पीआईबी। देश की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र का सबसे बड़ा योगदान है। किसान और कृषि वैज्ञानिक आत्मनिर्भर भारत के वास्तविक निर्माता हैं। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) में चयन प्रक्रिया में व्यापक बदलाव किए गए हैं जो कि पारदर्शिता, योग्यता और पद की प्रासंगिकता पर आधारित हैहै।

‘पद-केंद्रित’ होगी चयन प्रक्रिया

ICAR में अब चयन प्रक्रिया ‘पद-केंद्रित’ होगी। इसका अर्थ ये हुआ कि अब जिस पद के लिए चयन हो रहा है, उसके अनुरूप योग्यता और अनुभव को ध्यान में रखते हुए योग्य उम्मीदवार का सिलेक्शन किया जाएगा।

नई चयन प्रक्रिया में स्कोरिंग मॉडल में भी बदलाव किया गया है। स्कोरकार्ड और इंटरव्यु में किस पद के लिए क्या रेशियो रहेगा, आइए जानते हैं

अनुसंधान प्रबंधन पद (RMPs): 70:30

गैर-RMP (Heads/PCs): 75:25

प्रधान एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक: 80:20

यह मॉडल चयन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक मानकों पर आधारित बनाता है। अब केवल रिसर्च की संख्या नहीं, बल्कि H-Index के माध्यम से शोध के वास्तविक प्रभाव का मूल्यांकन होगा। साथ ही, नेतृत्व कौशल और प्रबंधन क्षमता को भी प्रमुख मीट्रिक बनाया गया है ताकि वैज्ञानिक उत्कृष्टता के साथ प्रशासनिक दक्षता भी सुनिश्चित हो।

अब भारतीय प्रवासी वैज्ञानिकों तथा अन्य संस्थानों की श्रेष्ठ प्रतिभाओं के लिए भी ICAR में चयन प्रक्रिया अधिक खुली और सुलभ होगी। चयन का हर चरण पारदर्शी और योग्यता-आधारित होगा।

उम्मीदवारों के मनोमितीय मूल्यांकन (Psychometric Analysis) और साक्षात्कारकर्ताओं के ओरिएंटेशन जैसे आयाम जोड़े गए हैं ताकि प्रक्रिया पूर्णतः वैज्ञानिक और त्रुटिरहित बने।

किसान और उद्योग के साथ जुड़े रिसर्च पर फोकस करने वाले उम्मीदवारों को वरीयता दी जाएगी। ICAR के DG डॉ. मांगी लाल जाट ने कहा, “यह सुधार सिर्फ चयन प्रक्रिया का नहीं, बल्कि पूरे ICAR की कार्यसंस्कृति में परिवर्तन का आरंभ है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हर वैज्ञानिक अपनी विशेषज्ञता – शोध, शिक्षण या विस्तार – के अनुरूप आगे बढ़ सके।”

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