प्रशांत कुमार
वैश्विक स्तर पर बढ़ते भूख संकट के बीच भारत ने एक बार फिर अपने मानवीय दृष्टिकोण और वैश्विक जिम्मेदारी का परिचय दिया है। भारत सरकार और विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत भारत संकटग्रस्त देशों और समुदायों को पोषक तत्वों से भरपूर खाद्यान्न, विशेष रूप से फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति करेगा।
भारत की कृषि शक्ति का वैश्विक उपयोग बड़े स्तर पर होने जा रहा है। भारत के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) ने डब्ल्यूएफपी को यह अवसर दिया है कि वह भारत से फोर्टिफाइड चावल की ले सके। इस सहयोग से न केवल भारत की कृषि समृद्धि का वैश्विक स्तर पर सदुपयोग होगा, बल्कि यह उन देशों और क्षेत्रों के लिए जीवनदायी साबित होगा जहां खाद्य संकट और कुपोषण एक गंभीर चुनौती बना हुआ है।
डब्ल्यूएफपी अब भारत से खाद्यान्न खरीदकर उसे उन क्षेत्रों में वितरित करेगा, जहां जंग, प्राकृतिक आपदाओं या आर्थिक अस्थिरता के कारण खाद्य सुरक्षा खतरे में है। इस तरह भारत एक “कृषि अधिशेष राष्ट्र” के रूप में अपनी भूमिका को मानवीय सहायता के क्षेत्र में और ज्यादा सशक्त बना रहा है।
“वसुधैव कुटुंबकम” की भावना का विस्तार
भारत का कहना है कि भारत वसुधैव कुटुंबकम – अर्थात् पूरी धरती एक परिवार है – के सिद्धांत पर विश्वास करता है। विश्व के जरूरतमंद समुदायों के प्रति हमारी मानवीय प्रतिबद्धता इसी दृष्टिकोण का हिस्सा है। हम साझा भविष्य की दिशा में सामूहिक जिम्मेदारी निभाने को तैयार हैं। इससे साफ होता है कि भारत की पहल केवल खाद्य सहायता भर नहीं है, बल्कि यह वैश्विक एकजुटता और मानवता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक भी है।
भारत की मदद पर डब्ल्यूएफपी ने आभार जताया और कहा कि हम एक खाद्य-सुरक्षित और शांतिपूर्ण विश्व के निर्माण में भारत की प्रतिबद्धता की गहराई से सराहना करते हैं। यह साझेदारी हमारे साझा उद्देश्य को मजबूत बनाती है और उन लोगों की निरंतर सहायता सुनिश्चित करती है, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। ऐसे समय में जब दुनिया खाद्य असुरक्षा और मानवीय सहायता के घटते फंड का सामना कर रही है, भारत का यह कदम बेहद प्रेरणा देने वाला है।
फरवरी 2025 के रोम सम्मेलन से शुरू हुई पहल
यह पहल फरवरी 2025 में रोम में आयोजित विश्व खाद्य कार्यक्रम की बैठक के दौरान शुरू हुई चर्चाओं का परिणाम है। उस समय भारत सरकार और डब्ल्यूएफपी के प्रतिनिधियों ने इस विषय पर गहन विचार-विमर्श किया था कि किस प्रकार भारत से खाद्यान्न की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है। यह समझौता उसी प्रक्रिया का औपचारिक रूप है, जो अब वैश्विक खाद्य वितरण के लिए एक स्थायी सहयोग तंत्र स्थापित करेगा। इस समझौते के माध्यम से भारत से खाद्यान्न की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी, ताकि संकटग्रस्त क्षेत्रों में मानवीय वितरण जारी रह सके।
सहयोग के अन्य क्षेत्रों पर भी हुई चर्चा
भारत और विश्व खाद्य कार्यक्रम के बीच यह सहयोग केवल चावल आपूर्ति तक सीमित नहीं है। इस दौरान सप्लाई चेन ऑप्टिमाइजेशन, फोर्टिफाइड राइस रोलआउट, अनाज एटीएम, जन पोषण केंद्र, स्मार्ट वेयरहाउसिंग तकनीक और फ्लोस्पैन यानी मोबाइल स्टोरेज यूनिट्स जैसे नवाचारों पर भी बात हुई। इन क्षेत्रों में संयुक्त प्रयासों से भारत और डब्ल्यूएफपी मिलकर न केवल घरेलू वितरण तंत्र को सुदृढ़ करेंगे, बल्कि इसे अन्य देशों के लिए भी एक मॉडल के रूप में पेश कर सकेंगे।
वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका का विस्तार
भारत पहले से ही विश्व के कई देशों को अनाज और मानवीय सहायता देता रहा है। हाल के वर्षों में श्रीलंका, अफगानिस्तान, सूडान और यमन जैसे देशों को भारत ने हजारों टन खाद्यान्न भेजा है। अब डब्ल्यूएफपी के साथ इस औपचारिक समझौते के बाद भारत की भूमिका एक “वैश्विक खाद्य आपूर्तिकर्ता और सहयोगी” के रूप में और मजबूत होगी।
मानवीय सहयोग का नया अध्याय
इस नई पहल के साथ भारत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह केवल आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ही नहीं, बल्कि “आत्मनिर्भर विश्व” के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहता है। डब्ल्यूएफपी के साथ यह साझेदारी भारत की कृषि शक्ति, तकनीकी क्षमता और मानवीय मूल्यों का सुंदर संगम है। यह न केवल वैश्विक खाद्य संकट से निपटने में मदद करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अधिक समान, सुरक्षित और पोषणयुक्त विश्व के निर्माण की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित होगी।
लेखक परिचय- प्रशांत कुमार 30 साल के अनुभव के साथ भारतीय पत्रकारिता जगत के एक प्रतिष्ठित नाम हैं। आज तक, एबीपी न्यूज और राज्यसभा टीवी जैसे संस्थानों से जुड़े रहे प्रशांत कुमार भारत एक्सप्रेस के संपादक रहे हैं। योजना, आजकल जैसी मैगजीन के लिए आर्टिकल्स लिखते रहे हैं। फिलहाल स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं।




