नई दिल्ली. (पीआईबी). केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने देश के पहले स्वदेशी एंटीबायोटिक नैफिथ्रोमाइसिन की समीक्षा की. इस दौरान बॉयो टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट, एम्स, BIRAC, ICMR और प्राइवेट सेक्टर के संबंधित एजेंसियों की संयुक्त बैठक बुलाई गई थी.
सरकार का फोकस
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी रुग्णता के मामले में भारत की वैश्विक रैंकिंग में चौथे स्थान पर है । हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि एचपीवी सर्वाइकल कैंसर का एकमात्र कारण नहीं है, लेकिन अध्ययनों से 90% सहसंबंध का पता चला है, जो लक्षित रोकथाम के मामले का समर्थन करता है।
उन्होंने कहा कि अंतिम उद्देश्य सर्वाइकल कैंसर के लिए सस्ती, सुलभ और आदर्श रूप से बड़े पैमाने पर जांच को सक्षम करना है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने चार प्रमुख फोकस स्तंभों को रेखांकित किया, जिनमें से शामिल हैं
- निवारक स्वास्थ्य सेवा – स्वास्थ्य सेवा का भविष्य रोकथाम में निहित है, इसलिए आगे बढ़ने के लिए यह सरकार का प्राथमिक फोकस होगा।
- युवा-केंद्रित निवारक उपाय – किशोरों और युवा महिलाओं मे सर्वाइकल कैंसर के खतरों को पहचान कर कम उम्र में ही उसके निदान पर ध्यान दिया जाएगा.
- महिला स्वास्थ्य – स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास सहित विभिन्न मंत्रालयों में सरकारी पहलों को मजबूत करना।
- पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप– एक ऐसा सिस्टम बनाना जहां पर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए लोकल से ग्लोबल लेवल पर सहयोग किया जा सके. “पीपीपी प्लस पीपीपी” शब्द गढ़ा, जो राष्ट्रीय सीमाओं के भीतर और बाहर सार्वजनिक-निजी भागीदारी को संदर्भित करता है, यह एक ऐसा मॉडल है जिसे कई यूरोपीय देशों द्वारा विशेष रूप से जीवन विज्ञान और स्वास्थ्य देखभाल में सफलतापूर्वक अपनाया गया है। एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हीमोफीलिया में जीन थेरेपी का सफल परीक्षण था, जिसे प्रतिष्ठित न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन (एनईजेएम) में स्थान मिला।
पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने वैज्ञानिक समीक्षा शुरू होने से पहले पहलगाम में कल हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। सभा में पीड़ितों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना और एकजुटता व्यक्त की गई।
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